कोटा

गांव में लगी चौपाल पर बैकफुट पर आए राजावत बोले नहीं बांधेंगे वीसीआर भरने वालों को पेड़ से

कोटा. वीसीआर भरने वाले विद्युत कर्मचारियों का पेड़ से बांधने के बयान पर उपजे विरोध के बाद विधायक भवानीसिंह राजावत बैकफुट पर आ गए हैं।

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Mar 09, 2018

वीसीआर भरने वाले विद्युत कर्मचारियों का पेड़ से बांधने के बयान पर उपजे विरोध के बाद विधायक भवानीसिंह राजावत बैकफुट पर आ गए हैं। राजावत ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में घोषणा की कि वीसीआर भरने वाले कर्मचारियों को अब पेड़ से नहीं बांधेंगे।
डाढ़देवी मंदिर के पास स्थित गणेशपुरा गांव में राजावत ने क्षेत्र के ग्रामीणों की चौपाल लगाई। वहां उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि मुख्यमंत्री ने बुधवार को घोषणा की है कि किसी भी ग्रामीण, किसान की वीसीआर नहीं भरी जाएगी। राजावत ने बताया कि जब सरकार ने वीसीआर नहीं भरने की घोषणा कर दी है तो हम भी क्यों बिजली विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों को पेड़ से बांधेंगे।
गौरतलब है कि राजावत के बयान के बाद विद्युत कर्मचारी संभागभर में आंदोलन पर उतर गए थे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने जोनल मुख्य अभियंता बी.एल. पचेरवाल के कार्यालय में तोडफ़ोड़ की तो उनके खिलाफ मुदकमे दर्ज हुए थे।

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...तो सुगम पोर्टल पर करें शिकायत
इस दौरान किसानों ने राजावत से शिकायत की कि बिजली कर्मचारी घरों के छोटे कनेक्शन पर ज्यादा लोड बताकर वीसीआर भरने की धमकी देते हैं, वसूली करते हैं। बिल जमा न हो तो लाइनमैन कनेक्शन काटने आ जाते हैं। इस पर राजावत ने सुगम पोर्टल पर शिकायत करने को कहा।

भ्रष्ट अधिकारियों को जनता सिखाएगी सबक
इधर, नई धानमंडी स्थित थोक फल सब्जीमंडी कार्यालय में मंडी समिति अध्यक्ष ओम मालव ने गुरुवार को लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र के किसान प्रतिनिधियों व भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बुलाई पत्रकार वार्ता में फिर दोहराया कि विधायक राजावत ने किसानों के हित की बात कही है। उन्होंने विजली विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों को सबक सिखाने का आह्वान किया था। सरकार ने वीसीआर भरने पर रोक लगा दी है, अब भी वीसीआर भरी गई तो जनता अधिकारियों को सबक सिखाएगी।

इस दौरान भाजपा मंडाना मंडल अध्यक्ष जगदीश हाड़ा ने कहा कि जगपुरा से मंडाना तक कई औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों ने बरसों पहले सीमित विद्युत खर्च के लिए कनेक्शन लिए थे। बाद इकाइयों का विस्तार कर लिया लेकिन पुराने कनेक्शन के आधार पर ही विद्युत उपभेग रहे। उनकी वीसीआर क्यों नहीं भरी जाती। भाजपा पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों के पास हाथ खर्च के रुपए नहीं, वे बिजली का बिल कहां से चुका पाएंगे। फसल बिकने पर किसान स्वत: बिल भुगतान कर देता है।

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Published on:
09 Mar 2018 11:35 am
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