
कोटा. पुलिस के रवैये में आए बदलाव और आमजन के हित में काम नहीं करने की शिकायतों का नतीजा साफ नजर आ रहा है। राज्य के 40 जिलों में लम्बे समय तक टॉप पांच में रहने वाली कोटा संभाग की पुलिस दिनों दिन फिसड्डी होती जा रही है। पुलिस की मासिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट ही इसकी हकीकत बयां कर रही है। मई की रिपोर्ट में कोटा ग्रामीण ही राज्य में पहले नम्बर पर रहकर अभी भी सिरमौर बना हुआ है। जबकि संभाग के अन्य 4 जिले टॉप पांच से बाहर हो गए हैं।
करीब दो साल पहले शुरू किए पुलिस के मासिक कार्य मूल्यांकन में कुछ समय पहले तक जहां राज्य में कोटा संभाग के पांचों जिले टॉप पांच में स्थान बनाए हुए थे। कभी कोटा शहर नम्बर रहा तो कभी कोटा ग्रामीण। जबकि बूंदी, बारां व झालावाड़ भी टॉप 5 में ही जगह बनाए हुए थे। इसके बाद कोटा शहर नम्बर दो पर भी रहा। लेकिन वर्तमान में कोटा संभाग पुलिस की कार्यप्रणाली दिनों दिन कमजोर होती जा रही है।
मई 2018 की मासिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट पर नजर डालें तो कोटा ग्रामीण ही एक मात्र ऐसा जिला है जो अभी भी 94.50 अंक के साथ नम्बर एक पर अपना कब्जा बनाए है। जबकि शेष अन्य चारों जिले काफी नीचे पहुंच गए हैं।
7 से 14 तक नम्बर पर पहुंचे चारों जिले
मई की रिपोर्ट के अनुसार संभाग के शेष 4 जिले टॉप 5 से खिसककर 7 से 14 नम्बर तक पहुंच गए हैं। राज्य के 40 जिलों में से कोटा शहर पुलिस 63.63 अंक के साथ 7वें स्थान पर है। जबकि 62.41 अंक के साथ झालावाड़ 8वें, 59.61 अंक के साथ बारां 9वें और 48.79 अंक के साथ बूंदी जिला 14वें स्थान पर पहुंच गया है। जबकि 2.70 अंक के साथ भरतपुर जिला सबसे नीचे 40वें स्थान पर है।
पहले यह थी स्थिति
वर्ष 2017 में कोटा शहर अगस्त व नवम्बर में राज्य में पहले स्थान पर जबकि कोटा ग्रामीण दूसरे स्थान पर रहा था। इसके अलावा अधिकतर महीनों में कोटा ग्रामीण ही नम्बर एक पर बना हुआ था। एक-दो महीनों में बूंदी को छोड़कर अधिकतर समय संभाग के ही पांचों जिले टॉप 5 में रहे थे। बूंदी जिला ही कभी 8 व 9वें स्थान तक
पहुंचा था।