कोटा

ये कहानी सपनों के उस शहर की है जिसके इशारे पर पूरी दुनिया चलती है…

दुनिया बनाने वालों का निर्माण करता है कोटा  
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Mar 12, 2019
kota news
ये कहानी सपनों के उस शहर की है जिसके इशारे पर पूरी दुनिया चलती है...


कोटा. कोटा में तराशे जा रहे हीरे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी चमक बिखेर रहे हैं। जिस तरह यहां इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की कोचिंग प्राप्त करने के बाद एम्स व आईआईटी में पहुंचने वाला हर चौथा विद्यार्थी कोटा कोचिंग का होता है, ठीक उसी तरह अब विश्व की नामी सॉफ्टवेयर कंपनियों में सेवाएं दे रहे प्रतिभाशालियों में भी कोटा कोचिंग के स्टूडेंट्स शामिल हो रहे हैं। यहां के विद्यार्थी गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, लिंक्डइन समेत कई कंपनियों में काम कर श्रेष्ठता साबित कर रहे हैं। कोटा में सपनों को पूरा करने आए ये विद्यार्थी आज वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान कायम कर रहे हैं। यहां के छात्र वात्सल्य चौहान अमरीका में माइक्रोसॉफ्ट में बड़े पद पर हैं, वहीं रामचंद्र सांखला वॉशिंगटन में गूगल, रोहन कौंडल लिंक्डइन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।


1. वेल्डर का बेटा पहुंचा अमरीका

वात्सल्य चौहान बिहार से हैं और पिता वेल्डर हैं। कोटा में आकर पढ़ाई करने के बाद आईआईटी खडग़पुर से बीटेक किया और इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट में 1.2 करोड़ की जॉब ऑफ र हुई। वर्तमान में वहीं कार्यरत हैं।

2. पिता कुली, कोटा ने बेटे को बनाया आईआईटियन
पाली जिले के सोजत के रामचन्द्र सांखला के पिता कुली का कार्य करते हैं। कोटा में पढ़ाई के बाद आईआईटी रूड़की से बीटेक की और अब गूगल में कार्यरत हैं।


3. सॉफ्टवेयर इंजीनियर है रोहन
रोहन कौंडल हिमाचल प्रदेश का ऊना निवासी है और कोटा में 2008 में इंजीनियरिंग की तैयारी की। इसके बाद आईआईटी दिल्ली से बीटेक किया और अब लिंक्डइन में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्यरत हैं।

आईआईटी से बेहतर फैकल्टी
आईआईटी कानपुर के स्टूडेंट्स की विंग द्वारा निकाली जाने वाली मैग्जीन वॉक्स पॉपुली के लिए की गई स्टडी में सामने आया कि स्टूडेंट्स परम्परागत स्कूली शिक्षा को पीछे छोड़ते हुए कोचिंग सिस्टम से जुड़ रहे हैं। इस सर्वे में 75 प्रतिशत विद्यार्थियों ने यह भी माना कि कोचिंग फैकल्टीज आईआईटी कानपुर से भी अच्छा पढ़ाती हैं। आईआईटी में प्रवेश पाने के लिए कोचिंग के साथ मिलकर मेहनत कर रहे हैं। सर्वे में सामने आया कि 66.4 प्रतिशत विद्यार्थी 11वीं में आने के बाद कोचिंग से जुड़ते हैं। 93.5 प्रतिशत विद्यार्थियों ने कोचिंग इंस्टीट्यूट की पढ़ाई को स्कूल की पढ़ाई से बेहतर बताया है। यही नहीं 57 प्रतिशत विद्यार्थियों ने कोटा की कोचिंग को बेहतर बताया और कहा कि कोटा में कोचिंग की जानी चाहिए।


आईआईटी दिल्ली की भी मुहर
दिल्ली आईआईटी स्टूडेंट्स द्वारा 2018 के फ्रे शर्स स्टूडेंट्स पर सर्वे किया गया। 649 स्टूडेंट्स पर किए सर्वे में 566 छात्र व 83 छात्राएं शामिल थीं। इसमें से मात्र 21 स्टूडेंट्स ऐसे थे, जिनका कहना था कि वे किसी कोचिंग से नहीं जुड़े थे। 591 सीधे कोचिंग से जुड़े थे। 17 प्राइवेट ट्यूशन पर निर्भर थे। 10 ने दूरस्थ शिक्षा के जरिए कोचिंग की। 60 प्रतिशत स्टूडेंट्स ऐसे थे, जन्होंने एक साल ड्रॉप करके तैयारी की। 80 प्रतिशत विद्यार्थी छोटे गांव व कस्बों, जबकि 10 प्रतिशत स्टूडेंट्स मेट्रो सिटीज से थे।

महिला शक्ति का उदाहरण कोटा
1. युवाओं के सपनों के शहर कोटा में बेटियां भविष्य की इबारत लिख रही हैं।

2. कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर प्रांत से छात्राएं डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना लिए कोटा आ रही हैं।
3. कोटा एक ऐसा शहर है, जहां करीब 55 हजार छात्राएं कोचिंग ले रही हैं। इनमें 35 हजार से अधिक छात्राएं मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की कोचिंग ले रही हैं।

4. वर्ष 2018 में एम्स के परिणामों में टॉप तीनों स्थानों पर लड़कियां रही। पहले स्थान पर कल्पना, दूसरे पर रामनीक और तीसरे स्थान पर महक अरोड़ा रही। टॉप 10 में चार छात्राओं ने स्थान बनाया। 10वें नम्बर पर एक्वांशु अग्रवाल रहीं।

राष्ट्रीय औसत से ज्यादा परिणाम

कोटा में पढऩे वाले विद्यार्थियों का परिणाम राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक रहता है। इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की बात करें तो आईआईटी की 11 हजार 279 सीटों के लिए करीब 12 लाख विद्यार्थी परीक्षा देते हैं। इनमें से करीब एक लाख विद्यार्थी कोटा आकर तैयारी करते हैं। 50 हजार परीक्षा देते हैं और इनमें से करीब 3 से 4 हजार विद्यार्थी ऐसे होते हैं, जो आईआईटी में प्रवेश प्राप्त करते हैं। इसके अलावा एनआईटी, ट्रिपलआईटी व अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों की 30 से 35 हजार सीटों पर यहां के विद्यार्थी प्रवेश प्राप्त करते हैं। यही नहीं टॉप रैंकर्स में भी कोटा के विद्यार्थी रहते हैं। इसी तरह मेडिकल में भी एम्स में सर्वाधिक विद्यार्थियों का चयन कोटा से होता है।

Updated on:
11 Mar 2019 11:26 pm
Published on:
12 Mar 2019 07:00 am