
कोटा. राजभवन ने कोटा विश्वविद्यालय में खेल कोटे से हुए फर्जी एडमिशन की जांच रिपोर्ट तलब की है। राजभवन ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न करने पर भी विवि प्रशासन की फटकार लगाई है।
वहीं विधायक के साथ अभद्रता करने वाले छात्रों पर कार्रवाई करने से विवि की अनुशासन समिति ने पल्ला झाड़ लिया है। जिसके बाद मामला एक बार फिर कुलपति के पास पहुंच गया है।
कोटा विश्वविद्यालय में खेल प्रतियोगिताओं के फर्जी प्रमाण पत्रों से छात्रों को एडमिशन दिए जाने के आरोप लगे थे।
न्यूनतम अंकों की शर्त पूरी न करने के बावजूद ऐसे आवेदकों को कोटा विश्वविद्यालय ने न सिर्फ प्रवेश प्रक्रिया में शामिल किया, बल्कि उनके दस्तावेजों की जांच किए बिना ही एडमिशन भी दे दिया।
पोल खुलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के नाम पर जमकर लीपापोती की। दो-दो बार जांच समितियां गठित की गईं, लेकिन हर बार जांच पूरी करने के बाद उसकी रिपोर्ट दबा दी गई।
यहां तक कि राजभवन के मांगने पर भी दोनों जांच रिपोर्ट नहीं भेजी गईं। जिससे नाराज राजभवन ने कोटा विश्वविद्यालय के अफसरों की जमकर फटकार लगाई है। इतना ही नहीं राजभवन ने कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र भेजकर दोनों जांच समितियों की रिपोर्ट तत्काल भेजने के आदेश भी दिए हैं।
विधायक से अभद्रता की जांच लटकी
विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में शामिल होने आए सांगोद विधायक और कोटा विवि प्रबंध मंडल के सदस्य हीरा लाल नागर से अभद्रता के मामले में विवि प्रशासन आरोपी छात्रों पर अभी तक कोई कार्रवाई तय नहीं कर सका है।
मामले की जांच और कार्रवाई के लिए कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने अनुशासन समिति के अध्यक्ष प्रो. एनके जैनम को निर्देश जारी किए थे, लेकिन विवि के नियमों के मुताबिक अनुशासन समिति आरोपी छात्रों पर तभी कार्रवाई कर सकती है जब उनके विभागाध्यक्षों ने छात्रों को निलंबित करने के बाद अपनी जांच रिपोर्ट भेजी हो।
अनुशासन समिति के इनकार के बाद आरोपी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का मामला एक बार फिर कुलपति के पास पहुंच गया है।