छावनी बाजार में सूई से लेकर बड़ी से बड़ी वस्तुएं आसानी से वाजिब दामों पर मिलती हैं
रियासतकाल में सुरक्षा में तैनात सैनिकों के निवास स्थान के रूप में छावनी प्रसिद्ध रहा है। अब सैनिक छावनी जैसा तो यहां कुछ नहीं है, लेकिन शहर का एक प्रतिष्ठित बाजार विकसित हो गया है। बाजार ऐसा कि सूई से लेकर बड़ी से बड़ी वस्तुएं आसानी से वाजिब दामों पर यहां मिल जाती हैं। इस बाजार में रोटी, कपड़ा और मकान से संबंधित सभी सामग्री आसानी से मिल जाती है।
लोगों ने बताया कि पहले यहां सैनिकों की छावनी थी, लेकिन आबादी बढ़ने के साथ यह क्षेत्र बाजार बन गया। यहां पहले 2 से 3 दुकानें हुआ करती थी। कच्ची बस्ती थी, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ परिवर्तन होने से अब यहां 450 के करीब दुकानें व आलीशान मकान हैं।
हालांकि यह बाजार एक तंग गली में विकसित है, लेकिन हर चीज उपलब्ध हो जाती है। यहां ग्राहकों का विश्वास जमा हुआ है। इस बाजार में बारां, बूंदी, झालावाड़, सांगोद, बोरखेड़ा, बपावर क्षेत्र समेत अन्य जगहों से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते है।
जूते, चूड़ा व सूट-बूट की चमक दिखती है
छावनी बाजार में जोधपुरी जूतियां, चूड़ा-चूडि़यां व रेडीमेड की दुकानें ज्यादा हैं। तीनों चीजाें की सामग्री खरीद के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। इस बाजार में आगरा के शूज की भी बिक्री होती है। इसकी खासी मांग रहती है। शादी-ब्याह के लिए सूट-बूट भी यहां तैयार होते हैं। इसके अलावा यहां जनरल स्टोर्स, ज्वैलर्स, किराना समेत अन्य दुकानें हैं। त्योहारी सीजन में यहां खासी भीड़ रहती है। बाजार में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती।
पार्किंग व अतिक्रमण है समस्या
इस बाजार में पार्किंग और अतिक्रमण की समस्या है। दिनभर में कई बार जाम के हालात बनते हैं। ईंट व मलबों की ट्रॉलियां निकलना बंद होनी चाहिए। त्योहारी सीजन में पुलिस प्रशासन को यहां व्यवस्था करनी चाहिए। इसके अलावा मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे हो जाते हैं। ऐसे में सीसी रोड बनना चाहिए।
व्यापारियों का यह कहना
यह बाजार रियासतकालीन है। पहले यहां सेना की छावनी हुआ करती थी। इसी के चलते इसका नाम छावनी पड़ा। इस बाजार में निम्न व मध्यम परिवारों का विश्वास जुड़ा है। सबसे ज्यादा ग्राहकी इन्हीं परिवारों की रहती है। दूरदराज से लोग यहां खरीदारी के लिए आते हैं।
डॉ. संतोष सिंह, अध्यक्ष, छावनी बाजार व्यापार संघ
यह बाजार रियासतकालीन है। पहले इस बाजार में तीन दुकानें थी। आसपास कच्ची बस्ती थी, लेकिन समय के साथ परिवर्तन होता गया। यहां शूज, चूड़ा-चूडि़यां व रेडीमेड कपड़ों की विशेष मांग रहती है। इस बाजार से पुराने ग्राहक आज भी जुड़े है।
सोहन जैन, व्यवसायी
बाजार में निम्न व मध्यम परिवारों के लिए वाजिब दामों में हर सामग्री आसानी से मिल जाती है। इसलिए इस बाजार के प्रति ग्राहकों का विश्वास जुड़ा है। इस बाजार से आसपास क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं।
योगेश गुप्ता, व्यवसायी
पहले हमारे शूज की शॉप थी। यहां पहले दो दुकानें हुआ करती थी। यहां आगरा से शूज बनवाकर बेचते थे। आज यहां करीब 15 शूज की दुकानें हो गई। उसके बाद मैंने बैग्स की शॉप में इसे तब्दील कर दिया। नए व पुराने बैग्स को हम ठीक करते हैं।
राजेन्द्र कुमार, व्यवसायी