5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

“मेरे कपड़े फाड़ लो, पर चूं भी नहीं करूँगा!” कोटा में व्यापारी और पुलिस के बीच हाईवोल्टेज ड्रामा, ट्रैफिक इंचार्ज ने हाथ जोड़कर किया ‘सरेंडर’

Kota Traffic News: लेकिन इस पूरे फसाद में सबसे ज्यादा चर्चा ट्रैफिक इंचार्ज के उस बयान की हो रही है, जिसने पूरे मामले का रुख ही मोड़ दिया।

2 min read
Google source verification

कोटा

image

Jayant Sharma

Apr 05, 2026

Kota News Pic

Kota News Pic

Kota News: राजस्थान के कोचिंग सिटी कोटा में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब एक साधारण ट्रैफिक चालान 'महा-संग्राम' में बदल गया। बीच सड़क पर पुलिस और एक व्यापारी के बीच ऐसी नोक-झोंक हुई कि माहौल तनावपूर्ण हो गया। लेकिन इस पूरे फसाद में सबसे ज्यादा चर्चा ट्रैफिक इंचार्ज के उस बयान की हो रही है, जिसने पूरे मामले का रुख ही मोड़ दिया।

सीट बेल्ट और फोन पर शुरू हुआ बवाल

जानकारी के अनुसार, मामला एक व्यापारी की कार से शुरू हुआ। कार में सवार व्यापारी ने न तो सीट बेल्ट लगाई थी और ऊपर से कान पर फोन लगाकर बात कर रहे थे। मुस्तैद ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने जब गाड़ी रुकवाई और 2 हजार रुपये का चालान काटने की प्रक्रिया शुरू की, तो व्यापारी का पारा चढ़ गया। देखते ही देखते दोनों पक्षों में तीखी बहस शुरू हो गई।

'सिंपैथी एडवांटेज' और फटे कपड़े

इस हंगामे के दौरान व्यापारी को मामूली चोट लग गई, जिसके बाद उसने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए भीड़ जुटा ली। माहौल पुलिस के खिलाफ बनता देख मौके पर कोटा ट्रैफिक इंचार्ज पहुंचे। व्यापारी 'सिंपैथी एडवांटेज' लेने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इंचार्ज साहब ने अपनी बातों से बाजी पलट दी। उन्होंने हाथ जोड़कर व्यापारी से कहा— "भैया, अगर तुम्हारे जी को तसल्ली नहीं मिली है तो मेरे कपड़े फाड़ लो। अगर मेरे मुंह से 'चूं' भी निकल गई तो मैं अपने पिता की संतान नहीं।"

पुलिस का तर्क: आपकी सुरक्षा ही हमारा मकसद

इंचार्ज ने डैमेज कंट्रोल करते हुए लोगों को समझाया कि कड़ाके की धूप, धूल और बारिश में पुलिसकर्मी किसके लिए खड़ा है? वह आपके और हमारे लिए ही व्यवस्था संभाल रहा है। अगर वह हेलमेट या सीट बेल्ट के लिए टोकता है, तो उसका मकसद सिर्फ इतना है कि आपका सिर और आपकी जान सुरक्षित रहे।


सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस


कोटा की सड़कों पर काफी देर तक चली इस खींचतान के बाद मामला शांत हुआ। लेकिन ट्रैफिक इंचार्ज का यह 'गांधीगिरी' वाला अंदाज अब शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस को इस हद तक झुकना पड़ना सही है या व्यापारियों का आक्रोश जायज था?