
कोटा.
नगर विकास न्यास की ओर से पांच साल पहले नियमों को ताक में रखकर निजी कॉलोनाइजर को भूमि आवंटन के प्रस्ताव को निरस्त किया जाएगा। 'राजस्थान पत्रिका' में इस आशय का समाचार प्रकाशित होने के बाद न्यास की भूमि पर अवैध रूप से काटी गई कॉलोनी में न्यास ने अपनी 'संपत्ति' के बोर्ड लगवा दिए हैं और भूमि पर कब्जा ले लिया है।
सूत्रों के अनुसार जल्द ही भूमि आवंटन प्रस्ताव निरस्त करने का पत्र राज्य सरकार को भेजा जाएगा। प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस भूमि पर अब न्यास की ओर से आवासीय योजना विकसित की जाएगी। इस भूमि का आवंटन पत्र जारी करने की प्रक्रिया पहले ही रोक दी थी, इसलिए इसकी रजिस्ट्री भी नहीं हो पाई।
नगर विकास न्यास कोटा तहसीलदार इमामुद्दीन का कहना है कि मौका निरीक्षण के बाद नगर विकास न्यास ने सरकारी भूमि पर न्यास की संपत्ति के बोर्ड लगा दिए हैं और कब्जा ले लिया गया है।
यह है मामला
नगर विकास न्यास अधिकारियों ने वर्ष 2013 में नियमों को ताक में रखकर और राज्य सरकार को गुमराह करके राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के पास 3.3 हैक्टेयर भूमि कॉलोनाइजर को आवंटित करने का प्रस्ताव अनुमोदित करा लिया था। जब इसकी शिकायत लोकायुक्त को हुई तो भूमि का आवंटन-पत्र रोक दिया गया, लेकिन राशि जमा होने के कारण आवंटन प्रस्ताव निरस्त नहीं हुआ। अब आवंटन प्रस्ताव निरस्त करने की तैयारी की जा रही है।
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ऐसे किया गुमराह
वर्ष 2013 में तत्कालीन न्यास सचिव की ओर से राज्य सरकार को भेज गए पत्र में लिखा था कि न्यास की भूमि मुख्य सड़क के पीछे की ओर है और आवेदक की भूमि से लगते हुए है, जबकि भूमि का भाग मध्य में आ रहा है। पत्र के आधार पर ही राज्य सरकार ने आवंटन की अनुमति दी थी। यह कॉलोनी डायमंड टाउनशिप के नाम से काटी गई है। इसमें खसरा नम्बर 17 से 24 तक 28 और 42 खसरा नम्बर न्यास की जमीन है। राज्य सरकार ने सितम्बर 2013 में कौशल कुमार मीणा को 3.3 हैक्टेयर भूमि आवंटित करने की स्वीकृति जारी की थी।
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नगर विकास न्यास सचिव ए.एल. वैष्णव का कहना है कि आवेदक को आवंटन पत्र जारी नहीं होने और रजिस्ट्री नहीं होने के कारण अभी भी भूमि न्यास की है। राज्य सरकार ने नियमों के दायरों में भूमि आवंटन की अनुशंसा की थी। अवैध रूप से कॉलोनी काटने का मामला सामने आने के बाद न्यास ने इस भूमि को अपने कब्जे में ले लिया है।