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Lok Sabha Election: कोटा-बूंदी में महंगाई-बेरोजगारी नहीं, मोदी की हार-जीत है सबसे बड़ा मुद्दा, पढि़ए खास रिपोर्ट

कोचिंग, कचौरी, डोरिया साड़ी और कोटा स्टोन के लिए मशहूर कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र के अपने मुद्दे हैं और यह इसकी इन खूबियों से ही जुड़े हुए हैं।
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Apr 18, 2019
Lok Sabha Election 2019
Lok Sabha Election: कोटा-बूंदी में महंगाई-बेरोजगारी नहीं, मोदी की हार-जीत है सबसे बड़ा मुद्दा, पढि़ए खास रिपोर्ट

राजेश त्रिपाठी @ कोटा.

कोचिंग, कचौरी, डोरिया साड़ी और कोटा स्टोन के लिए मशहूर कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र के अपने मुद्दे हैं और यह इसकी इन खूबियों से ही जुड़े हुए हैं। दो जिलों की आठ विधानसभा सीटों के 19 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। यहां शहरी क्षेत्र में मुद्दे अलग हैं और ग्रामीण इलाकों में अलग। इस बार किसी मुद्दे का शोर नहीं है। Bjp ने जहां वर्तमान सांसद ओम बिरला पर भरोसा जताया है, Congress ने पीपल्दा से विधायक रामनारायण मीणा को मैदान में उतारा है।

राजनीति में चुनाव लडऩे में कुशल राजनेताओं को करीब से देखना है तो कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में इसकी झलक देख सकते हैं। यहां BJP प्रत्याशी ओम बिरला तीन बार विधायक और एक बार सांसद रहने का अनुभव रखते हैं। उनके सामने Congress प्रत्याशी रामनारायण मीणा को विधानसभा के 9 और लोकसभा का एक चुनाव लडऩे का तजुर्बा है। ऐसे में यहां अनुभवी राजनेताओं के बीच रोचक मुकाबला है। यहां मुख्य तौर पर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही पिछले चुनावों में मुकाबला होता रहा है। इस बार कुल 15 प्रत्याशी मैंदान में हैं।

स्थानीय मुद्दों में हवाई सेवा, औद्योगिक विकास और किसानों की हालत प्रमुख मुद्दे हैं। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा सिर्फ मोदी को हराओ, PM Modi को जिताओ की बातों पर टिका है। जब शहर में नयापुरा चौराहा स्थित चाय की दुकान पर पहुंचा तो वहां चुनाव चर्चा में यह मुद्दा था। वहां खड़े महादेव से पूछा, क्या मुद्दा है तो यह जबाव दिया, मोदी को हराने या जिताने का ही मुद्दा है। जनता इस बार इस मुद्दे पर वोट का निर्णय करेगी कि मोदी को जिताना है या हराना है। किसी भी पार्टी का प्रत्याशी लोगों के लिए अहम नहीं है। युवा खामोश हैं, रोजगार की बात ही नहीं कर रहे। स्कूल कॉलेज, सड़क और अस्पताल किसी की जुबान पर नहीं है।

शहर से बाहर निकलकर तालेड़ा पहुंचा तो उपखंड कार्यालय से बाहर निकलकर आ रहे चंद्रप्रकाश से पूछा कि इस बार जातिगत वोट का क्या असर है। उन्होंने कहा, जातियों का रंग तो है पर, देशभक्ति का छोंका लगाया जा रहा है। वहीं कुंजबिहारी नागर का कहना है कि उनकी नजर में चुनाव में कोई मुद्दा नहीं है। उनके मौहल्ले की सड़क बन जाए तो अच्छा रहेगा। इससे ज्यादा वे कुछ नहीं सोचते। कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में 8 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। अभी आठ में से पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा काबिज है। ऐसे में कांग्रेस के लिए चुनावी नैया आसान नहीं है। वहीं भाजपा को इस बार चुनाव में स्थानीय मुद्दों पर जनता को जवाब देना होगा।

कांग्रेस फसलों के दाम नहीं मिलने से किसानों की मौत और हवाई सेवा शुरू नहीं हो पाने को मुद्दा बनाने के प्रयास में है। कोटा के बंद उद्योग भी lok sabha chunav का मुद्दा है। वहीं कांग्रेस को भी सभी किसानों का कर्ज माफ नहीं होने जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा कांग्रेस सरकार के 100 दिन के कामकाज को भी मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है।


इन्हें पार्टी और प्रत्याशी से कोई मतलब नहीं

लोकसभा के तमाम मुद्दों और दलों के बीच कई ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें न पार्टी से मतलब है न ही किसी प्रत्याशी से। शहर में स्टेशन क्षेत्र की रणजीत कॉलोनी में रोज की तरह दूध लेकर जा रही कौशल्या से पूछा कि इस बार चुनाव में क्या मुद्दा है तो कोशिल्या बोली सड़क तो बरसों से बनी नहीं है, इसलिए उसके बारे में सोच भी नहीं सकती है। जिस पार्टी के लोग वोट दिलाने ले जाएंगे वहीं दे देंगे। निहाल तो कोई करता है नहीं, सब जीतकर भूल जाते हैं।

आठ भाजपा, सात कांग्रेस
यहां अब तक हुए सोलह लोकसभा चुनाव में आठ बार यह भाजपा के पास रही और सात बार कांग्रेस के पास। 1952 के पहले चुनाव में यह सीट रामराज्य परिषद के रामचन्द्र सेन ने जीती थी। फिर लगातार चार बार 1957 से 1970 तक कांग्रेस के ओंकारलाल बैरवा ने परचम फहराया। 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर के.के गोयल ने जीत हासिल की और केन्द्र में मंत्री भी बने। वे 1980 के चुनाव में जीते। 1984 में कांग्रेस लहर में कांग्रेस के शांतिधारीवाल के हाथ जीत लगी। इसके बाद दाऊदयाल जोशी ने 1989 से 1996 तक लगातार तीन बार यह सीट भाजपा की झोली में डाली। 1998 में कांग्रेस के रामनारायण मीणा, 1999 और 2004 में भाजपा के रघुवीर सिंह कौशल के बाद कांग्रेस के इज्यराज सिंह सांसद रहे। 2017 में भाजपा के ओम बिरला ने जीत दर्ज की।

लोकसभा एक नजर में
कुल मतदाता : 19 लाख 31 हजार 460
पुरुष मतदाता : .09 लाख 97 हजार 740
महिला मतदाता : 09 लाख 33 हजार 720

Published on:
18 Apr 2019 08:30 am