
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और विपक्षी कांग्रेस समेत तमाम दल लोकसभा चुनावों से पहले मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का जमकर उपयोग कर रहे है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव केवल चुनाव न होकर एक युद्ध की तरह लड़ा जाएगा और इसमें कुरूक्षेत्र सोशल मीडिया होगा।
सभी दलों के नेताओं के अनुसार सोशल मीडिया में चुनाव की जंग लडऩे के लिए बीजेपी ने लगभग 50 लाख वालिंटियर्स और कांग्रेस ने लगभग 22लाख वालिंटियर्स को तैनात किया है। स्थानीय नेता भी इस मामले में पीछे नहीं है। हाड़ौती के दोनों सांसद ओम बिरला और दुष्यंत सिंह के वेरीफाइड पेज है वहीं इस मामले में कांग्रेस की तरफ से अशोक चांदना और प्रमोद भाया शिखर पर है। लोकसभा चुनावों के मदद्ेनजर सभी नेताओं और संभावित दावेदारों ने अपने सोशल मीडिया वॉर रूम को तैयार और सचेत कर दिया है।
युवा वोट बटौरने की कोशिश
अब सोशल मीडिया युवाओं को किसी भी चीज़ से ज्यादा प्रभावित करता है। युवा मतदाता पारंपरिक मीडिया पर आधारित नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने के आधार पर अपनी राय बनाते हैं। यही कारण है कि सभी पार्टियां सोशल मीडिया पर अभियान चला रही हैं।
देर आए लेकिन दुरूस्त आए..
भाजपा के मुकाबले कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर देर से शुरुआत की है लेकिन दमदार कोशिश की है। इसका नतीजा राज्यों के चुनाव नतीजों से भी पता चलता है।
कौन कितना भारी
ट्विटर पर कांग्रेस की तुलना में भाजपा के फॉलोवर्स तीन गुना ज्यादा है, लेकिन फेसबुक पर कांग्रेस पार्टी भारी पड़ रही है। फेसबुक पर बीजेपी के 1.5 करोड़ लाख फॉलोवर्स की तुलना में कांग्रेस के 53 लाख फॉलोवर्स हैं।
पार्टी- फेसबुक- ट्वीटर
भाजपा 1.5 करोड़ 1.1 करोड़
कांग्रेस 52 लाख 53 लाख
नेता- फेसबुक- ट्वीटर
नरेंद्र मोदी- 1.5 करोड़ -1.1 करोड़
कांग्रेस- 52 लाख -53 लाख