कोटा

इस अस्पताल में हो रही हैं मानवीय संवेदनाएं तार-तार, जानकर आपका दिल पसीज जायेगा

इस अस्पताल में हो रही हैं मानवीय संवेदनाएं तार-तार, जानकर आपका दिल पसीज जायेगा

2 min read
Jun 24, 2018
mbs hospital kota

कोटा
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एमबीएस अस्पताल में वेतन वृद्धि व स्थायीकरण की मांग को लेकर पिछले तीन दिन से चल रही संविदा कार्मिकों की हड़ताल से अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं और मानवीय संवेदनाएं तार-तार हो रही हैं। शवों को लाने-ले जाने वाले तक उपलब्ध नहीं हैं। शनिवार को परिजन ही शव स्टे्रचर पर पोस्टमार्टम कक्ष तक ले जाते नजर आए। अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्थाओं का दावा कर रहा लेकिन वह फेल ही दिखी। अस्पताल में 450 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इनमें सफाईकर्मी, कंप्यूटर ऑपरेटर, फार्मासिस्ट, हेल्पर शामिल हैं।

शव आधे घंटे तक स्टे्रचर पर पड़ा रहा

ये भी पढ़ें

कोटा के ये दरवाजे खुले हैं आत्महत्या करने वालों और प्रदनकारियों के लिए

शव को ढोते पहुंचे मोर्चरी सोहन लाल सैनी ने बताया कि फोरलेन पर बबूल पेड़ कटाई का काम चल रहा है। शनिवार को चार मजदूर काम कर रहे थे। अचानक ट्रेलर आया और महिला मजदूर मनभर बाई मीणा को तेजी से टक्कर मारी। वहां काम कर रहे अन्य मजदूरों ने उसे एमबीएस अस्पताल पहुंचाया। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव को जब पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी तक लाने की बात सामने आई तो शव को उठाने वाला कोई नहीं मिला। कर्मचारियों के अभाव में शव आधे घंटे तक स्टे्रचर पर पड़ा रहा। बाद में साथ आए मजदूर ही शव को मोर्चरी में स्टे्रचर पर घसीटकर लेकर गए। उसके बाद मृतक महिला का पोस्टमार्टम हुआ।


संक्रमण का खतरा बढ़ा

एमबीएस अस्पताल के कार्मिकों के हड़ताल पर चलने से सफाई व्यवस्था ठप सी हो गई। एमबीएस अस्पताल से तीन दिन से कचरा नहीं उठ रहा है। इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू व अन्य वार्डों में डस्टबिन कचरे से अटे पड़े है। कचरा डस्टबिन के आस-पास ही फेंका जा रहा है। साथ ही बायो मेडिकल वेस्ट कलेक्शन भी बंद हो गया है। मरीजों की गंदी बेडशीट्स बदली नहीं जा रही है। इन सब से इंफेक्शन का मरीजों पर खतरा मंडरा रहा है।

हाथों की पर्ची नहीं मान्य

कंप्यूटर ऑपरेटरों के हड़ताल पर शामिल होने से मरीजों की जांच रसीद, भर्ती व परामर्श पर्ची व दवा समय से नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मरीज घंटों इलाज के इंतजार में स्ट्रेचर या ट्रॉली पर ही लेटे रहते हैं। इन मरीजों की परेशानी को देखकर भी संविदा कार्मिकों का मन नहीं पिघल रहा है, वह अपनी हठधर्मिता पर अड़े हुए हैं। अस्पताल प्रबंधन हड़ताल के चलते बेबस और लाचार महसूस कर रहा है। अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर नर्सिंग कार्मिकों को लगाकर हाथ से पर्ची बनवाना शुरू कर दिया है, लेकिन जांच रसीद काउंटर पर कंप्यूटर की पर्ची मांगकर मरीज व उसके परिजनों को वापस लौटा दिया जाता है। ऐसे में मरीज निजी केंद्रों पर जांच करवाने को मजबूर हो रहे हैं।

भामाशाह काउंटर पर घंटों बाद भी नम्बर नहीं

अस्पताल में भामाशाह काउंटर पर मरीजों व उनके तीमारदारों का घंटों बाद भी नम्बर नहीं आ रहा है। कापरेन के सोफेन ने बताया कि उनकी मां को ब्रेन कैंसर है। वह भर्ती है। इलाज के लिए भामाशाह काउंटर पर एंट्री के लिए आया और दो घंटे तक इंतजार किया। लेकिन नम्बर नहीं आया। काउंटर पर नर्सिंग स्टाफ को लगा रखा है, लेकिन वह कम्प्यूटर को ऑपरेट नहीं कर पा रहे है। इससे परेशानी बढ़ी है।


करेंगे भूख हड़ताल

हड़ताली कार्मिक इमरजेंसी के बाहर धरना लगाकर बैठे हुए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल से ठेका प्रथा बंद होनी चाहिए। कार्मिकों को वेतन वृद्धि कर स्थायी करना चाहिए। वर्तमान में प्रतिमाह चार हजार रुपए ही मिलते है, एेसे में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के साथ घर चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्हें हड़ताल करते 3 दिन हो गए हैं, लेकिन उनकी बात को कोई नहीं सुन रहा है। आगे भी प्रशासन का यही रवैया रहा तो हम भूख हड़ताल शुरू कर देंगे।

ये भी पढ़ें

ऐसा क्या हुआ कि गुजरात सरकार को मांगनी पड़ी जोधपुर के निर्यातकों से मदद…
Published on:
24 Jun 2018 05:49 am
Also Read
View All