हाड़ौती में फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए किसान देसी जुगाड़ कैल्शियम कार्बाइड गन का उपयोग किया जा रहा है
अभिषेक गुप्ता
kota news: हाड़ौती में फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए किसान देसी जुगाड़ कैल्शियम कार्बाइड गन का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इस गन का सावधानीपूर्वक उपयोग नहीं करने से किसानों की आंखों की रोशनी भी छीन रहा है। पिछले कुछ दिनों में ऐसे मामले सामने आए हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि हर साल इस तरह के मामले सामने आते हैं, जिनमें किसानों की आंखों की रोशनी चली जाती है।
जुगाड़ से बनाते हैं गन
यह गन दो अलग-अलग साइज के पीवीसी पाइपों से बनाई जाती है, जो कैल्शियम कार्बाइड और पानी के मिश्रण का उपयोग करके एक धमाका करती है। जब कैल्शियम कार्बाइड पानी के साथ प्रतिक्रिया करता है तो एसीटिलीन गैस उत्पन्न करता है, जिसे प्रज्वलित किया जाता है, ताकि तेज धमाका हो। यह जोरदार आवाज जंगली जानवरों को डराने के लिए की जाती है।
कॉर्नियल चोट से रोशनी जाने का खतरा
नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पाण्डेय ने बताया कि कैल्शियम काबाईड गन आंखों के लिए खतरनाक हो सकती है। सावधानी नहीं बरतने या गलत तरीके से उपयोग करने पर क्षारीय कॉर्नियल बर्न होने के कारण गंभीर आंखों की चोटों का कारण बन सकती है। यदि तुरंत इलाज न किया जाए तो संभावित अंधापन हो सकता है।
यह केस आ चुके सामने
बारां जिले के छीपाबड़ौद निवासी 45 वर्षीय सीताराम की दाहिनी आंख में कैल्शियम कार्बाइड गन से गंभीर चोट लगी। उनकी दाहिनी आंख में ग्रेड फोर कॉर्नियल बर्न ( पारदर्शी पुतली में गंभीर क्षारीय क्षति) होने के कारण दिखाई देना बंद हो गया। कैमिकल कोर्नियल बर्न के साथ-साथ थर्मल स्किन बर्न भी हुआ।
झालावाड़ जिले के दहीखेड़ा निवासी 32 वर्षीय निवासी राजू नागर की बायी आंख में कैल्शियम कार्बाइड गन से चोट लगी थी। उनकी बायी आंख में ग्रेड टू कॉर्नियल बर्न (पारदर्शी पुतली में क्षारीय क्षति) होने के कारण दिखाई देना बहुत कम हो गया। कोटा के उनका उपचार किया गया। रोशनी चली गई।
किसानों के लिए आंखों की सुरक्षा के सुझाव
1. कैल्शियम कार्बाइड या मलबे के संभावित छींटों से अपनी आंखों को बचाने के लिए हमेशा सुरक्षा गॉगल्स पहनें।
2. कैल्शियम कार्बाइड के सीधे संपर्क से बचें। इसे सुरक्षित रूप से संभालने के लिए दस्ताने और उपकरणों का उपयोग करें।
3. गन को ट्रिगर करते समय एक सुरक्षित दूरी बनाए रखें ताकि विस्फोट के आकस्मिक संपर्क से बचा जा सके।