
कोटा/सुल्तानपुर.
जल स्वावलम्बन और जल संरक्षण के चौतरफा सरकारी शोर के बीच जिले में ग्राम पंचायतों की अनदेखी के चलते परम्परागत जल स्रोत दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। तालाब हो या कुएं, सारसंभाल के अभाव में अस्तित्व खोने की कगार पर हैं। ऐसा ही हाल सुल्तानपुर क्षेत्र के बड़ौद कस्बे में स्थित प्राचीन तलाई का है। गांव के मध्य में बनी हुई 2 बीघा की प्राचीन तलाई इन दिनों पंचायत प्रशासन की अनदेखी के चलते गंदगी का शिकार हो गई है। यहां इसकी सफाई करने के बजाय कस्बे का कचरा, गदंगी तलाई में डाले जा रहे हंै। जिससे अब तलाई का पानी भी दूषित होने लगा है। वहीं दुर्गंध के मारे सभी परेशान हैं।
सुरक्षा दीवार मांग रही मरम्मत
यहां मरम्मत व जीर्णोद्धार के अभाव में तलाई की भराव क्षमता काफी कम हो गइ है। इसमें बारिश के समय पूरी बस्ती का पानी एकत्रित होता है तो नहर से भी पानी आता है। ऐसे में भराव क्षमता कम होने से तलाई टूटने का खतरा बना रहता है। गांववासी दिनेश मेहरा व कुलदीप शर्मा ने बताया कि गत वर्ष भी बारिश के समय तलाई की सुरक्षा दीवार से पानी रिसाव होने के कारण निचली बस्ती के कई घरों में पानी घुस गया था। समय रहते सुरक्षा दीवार कर मरम्मत करवाने से बड़ा हादसा टल गया। अब बारिश नजदीक आने के बाद भी तलाई की मरम्मत नहीं कराई गई है। ऐसे में इसके क्षतिग्रस्त होने का अंदेशा बना हुआ है।
बारिश से पहले करवाएंगे मरम्मत
जब पत्रिकाडॉटकॉम ने इस बारे में बड़ौद के ग्राम विकास अधिकारी रामराज मीणा से बात की तो उन्होंने बताया कि तलाई में गंदे पानी की निकासी के लिए अलग से नाला बनाने का प्रस्ताव भिजवाया हुआ है। तलाई की मरम्मत कार्य को लेकर भी पूरी तैयारी है। बारिश से पहले कार्य करवा लिया जाएगा ताकि बारिश में कोई परेशानी न हो।