कोटा

Big News: अब एक हजार गरीब गर्भवती की जिम्मेदारी उठाएंगे सांसद बिरला

कहीं लाचारी, कहीं गरीबी और अन्य दूसरे कारणों से गर्भस्थ शिशुओं में होने वाली समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को अब कोटा के सांसद ओम बिरला संबल देंगे।
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Updated: 22 Apr 2018, 11:44 AM IST
mp om Birla

कोटा . कहीं लाचारी, कहीं गरीबी और अन्य दूसरे कारणों से गर्भस्थ शिशुओं में होने वाली समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को अब कोटा के सांसद ओम बिरला संबल देंगे। गरीबी की वजह से खुद की देखभाल नहीं कर पा रही एक हजार महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान व प्रसव के बाद तक पौष्टिक भोजन के साथ आवश्यक दवाएं व अन्य सामग्री नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

योजना के तहत महिला चिकित्सक महिला व गर्भस्थ शिशु का तो खयाल रखेंगी ही, प्रसव के बाद शिशु को गंभीर बीमारियों से बचाव के टीके भी लगवाए जाएंगे। गौरतलब है कि देश में 15 से 49 साल की महिलाओं में 51.4 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। अभियान की तैयारियों को लेकर शनिवार को बिरला ने सूचना एवं जनसम्पर्क भवन के सभागार में नर्सिग स्टूडेंट, आशा सहयोगियों के साथ तैयारी बैठक कर रूपरेखा तय की।


सांसद बिरला ने बताया कि उन्होंने ऐसे अनेक मामले देखे, जिनमें गर्भवती माता के कुपोषण की वजह से बच्चे में जन्म के साथ ही कमी रह जाती है। कुछ मामलों में नि:शक्तता भी हो जाती है। खामियाजा बच्चे को जीवन भर उठाना पड़ता है। इस तरह के मामलों में ना विकृतियों के साथ जन्म लेने वाले शिशु का कसूर होता है और ना मां का। इसलिए ही उन्होंने शुरूआत में ऐसी एक हजार महिलाओं की मदद का फैसला किया है।

ऐसे होगा जरूरतमंदों का चयन
कमजोर तबके, कच्ची बस्ती की महिलाएं एवं श्रमिक के तौर पर काम करने वाली महिलाओं में कुपोषण की समस्या अधिक रहती है। यदि गर्भावस्था के दौरान मां को पोषण नहीं मिलेगा तो गर्भस्थ शिशु को भी खतरा रहता है। योजना के तहत शहर की कच्ची बस्तियों में आशा सहयोगिनियों के माध्यम से सर्वे कराकर एक हजार ऐसी महिलाओं को चिन्हित किया जाएगा जो गर्भवती हैं, लेकिन निर्धनता के कारण पौष्टिक भोजन से वंचित हैं।

लोहे के बर्तन में बनाएं खाना
गर्भवती महिलाएं अपना भोजन लोहे के बर्तनों में बना कर भी खुद को लाभ पहुंचा सकती हैं। सर्जन डॉ. अमिता बिरला के अनुसार गर्भवती को हाईप्रोटीन डाइट की जरूरत होती है जिसमें आयरन और प्रोटीन हो। मसलन हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित चना-मूंग, दालें, दो गिलास दूध, गुड़ रोजाना के भोजन में शामिल करें। सभी तरह की सब्जी खाएं।

अधूरे फेफड़ेे कमजोर दिमाग
माता में कुपोषण सामान्यत: रक्त अल्पता [एनीमिया] ही होता है। एनीमिक मां के होने वाले बच्चे जन्म से पहले ही जिंदगी के लिए संघर्ष में फंस जाते हैं। महिला रोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. अस्मा खान ने बताया कि मां के कुपोषित होने पर अक्सर नौ महीने में भी गर्भस्थ शिशु का विकास सात महीने जितना ही हो पाता है। कई बार बच्चे के फेफड़े नहीं बन पाते और कभी दिमाग विकसित नहीं हो पाता।

एनीमिक महिलाओं के गर्भस्थ शिशु के कमजोर होने पर अक्सर डिलीवरी में ऑपरेशन की नौबत आ जाती है। बच्चे की प्रतिरोधकता भी कम रहती है। डॉ. खान ने बताया कि कोटा में साठ फीसदी तक एनीमिक महिलाएं आती हैं। इसमें बड़ा कारण आर्थिक है। दूसरा कारण महिला होने से उपेक्षा भी होता है।

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