कोटा

रणथम्भौर में अभी जितने हैं उससे 50 साल पहले अपने मुकुन्दरा में थे ज्यादा टाइगर

मुकुंदरा और तत्कालीन दरा गेम सेंचुरी व आस-पास के जंगलों 1950 तक 70 बाघों का बसेरा था। 1970 में इनकी संख्या घटकर 15 रह गई।
2 min read
• •
Updated: 19 Mar 2018, 12:27 PM IST
mukundra hills tiger reserve
मुकुंदरा हिल्स को आबाद करेंगे रणथंभौर के टाइगर

कोटा . मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में बाघ-बाघिन की प्रस्तावित शिफ्टिंग वाकई हाड़ौतीवासियों को उत्साहित किए हुए है। आज के इसी मुकुंदरा और तत्कालीन दरा गेम सेंचुरी व आस-पास के जंगलों 1950 तक 70 बाघों का बसेरा था। 1970 में इनकी संख्या घटकर 15 रह गई। राजस्थान वाइल्ड लाइफ प्रिवेंशन्स बोर्ड के सदस्य और तत्कालीन दरा गेम सेंचुरी के मानद गेम वार्डन मेजर आपजी कल्याण सिंह की 1970 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में इसका उल्लेख है। बाघों के अलावा जंगल में अन्य वन्यजीव भी थे। बढ़ते मानव दखल और अन्य कारणों से बाघ बेदखल हो गए।

Big News: कोटावासियों ध्यान दें, घर के बाहर लगे एसी पर कबूतर बैठा तो हो सकती है आपकी मौत

सत्तर के दशक तक थे आबाद
पूर्व वन अधिकारी राकेश शर्मा भी बताते हैं कि दरा अभयारण्य और हाड़ौती के जंगलों में हमेशा से ही बाघों का बसेरा रहा है। 1970-1972 तक दरा व आस-पास के जंगलों में बाघ रहे। बढ़ते मानवीय दखल और बाघों के भोजन में आई कमी से ये यहां से जाते रहे। शिकार भी इनके खात्मे का कारण रहा।

OMG! सावधान! शावर और स्वीमिंग पूल में नहाने से पहले पढ़ लीजिए यह खबर, नहीं तो बहुत पछताएंगे आप

इन क्षेत्रों में था बसेरा
मेजर कल्याण सिंह की रिपोर्ट के अनुसार चंबल की घाटियों, उम्मेदगंज, आलनिया, दरा, शेरगढ़, राज्या देवी, रामगढ़, किशनगंज, शाहबाद व हाड़ौती के आस-पास के जंगलों में दर्जनों बाघों का बसेरा था। इन्हीं क्षेत्रों में पेंथर भी पाए जाते थे।

गवाही दे रहे यह पत्र

रि यासत काल में शासन की ओर से चिकित्सक के नाम लिखी गया पत्र पत्रिका के हाथ लगी हैं, जिनमें शिकार को लेकर चिकित्सक को तत्कालीन 'हिज हाइनेस के साथ रहने को लिखा गया। ये पत्र तत्कालीन असिस्टेंट सब सर्जन मोहनलाल जैरथ को कोटा स्टेट के चीफ मेडिकल ऑफिसर ने लिखे थे। पहला पत्र 01 जून 1932 और दूसरी पत्र 4 मार्च 1933 की है। पत्रों में जैरथ को बताया गया है कि तत्कालीन 'हिज हाइनेस कुमार साहिब शिकार पर जा रहे हैं और उन्हें उनके साथ जाना है। मोहनलाल जैरथ के पुत्र नरेन्द्र जैरथ बताते हैं कि पत्रों में 'शिकार से तात्पर्य बाघों के शिकार से ही था। शासक प्राय: बाघ के शिकार को ही जाते थे। तत्समय बाघों के शिकार के वक्त जख्मी आदि होने की दशा में उपचार के लिहाज से उनके पिता को ले जाया जाता था।

Published on: