कोटा. कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों में मस्तिष्क विकृतियां उत्पन्न हो रही है। इसमें मनोवृत्ति व याददाश्त कमजोर होने की संभावना बनी रहती है। कोरोना के बाद इंसेफ लाइटिस की समस्या भी काफ ी देखी गई है। कोरोना से ठीक हुए मरीजों के दिमाग में सूजन आ जाती है। साथ ही खून के थक्के जमने की शिकायत भी देखने को मिल रही है। वर्तमान में कोरोना मरीजों के 30 से 35 प्रतिशत में नर्वस सिस्टम संबंधी लक्षण देखने को मिल रहे हैं।
कोटा. कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों में मस्तिष्क विकृतियां उत्पन्न हो रही है। इसमें मनोवृत्ति व याददाश्त कमजोर होने की संभावना बनी रहती है। कोरोना के बाद इंसेफ लाइटिस की समस्या भी काफ ी देखी गई है। कोरोना से ठीक हुए मरीजों के दिमाग में सूजन आ जाती है। साथ ही खून के थक्के जमने की शिकायत भी देखने को मिल रही है। वर्तमान में कोरोना मरीजों के 30 से 35 प्रतिशत में नर्वस सिस्टम संबंधी लक्षण देखने को मिल रहे हैं।
ये बात आईएमए कोटा अध्यक्ष व वरिष्ठ न्यूरोलॉजिष्ठ डॉ संजय जायसवाल ने कही। कोटा ज्ञानद्वार एजुकेशन सोसायटी एवं आईएसटीडी कोटा चैप्टर 'हम तुम और कोरोनाÓ ब्रेन स्ट्रोक, मस्तिष्क व नर्वस सिस्टम की बीमारियां विषय पर आयोजित वेबिनार में डॉ. जायसवाल ने कहा कि कोरोना के बाद दिमाग में ब्लड क्लोटिंग हो जाती है, इससे स्ट्रोक भी हो सकता है। कई कोरोना के मरीजों में यह समस्या देखने को मिल रही है।
वहीं गुलियन वेरी सिंड्रोम में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करती है, इससे कमजोरी, सुन्नपन, झनझनाहट और पैरालाइसिस का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना से ठीक हुए मरीजों में कई तरह के साइड इफेक्ट देखे जा रहे हैं। जिन पर शोध भी किया जा रहा है। वेबिनार में आईएसटीडी कोटा चैप्टर की चेयरपर्सन अनीता चौहान ने कहा कि हम तुम और कोरोना के माध्यम से डॉक्टर्स से हर संभव सहायता एवं सुझाव इस प्लेटफ ार्म के माध्यम से लोगों को प्रदान किए जा रहे हैं। मीडिया प्रभारी डॉ. पारुल सिंह ने बताया कि वेबिनार में कोटा, जयपुर दिल्ली, काकरापार, कलकत्ता, मुंबई, देहरादून से प्रतिभागी उपस्थित रहे।