कोटा

कर्मचारी का नहीं हुआ फायदा, रोडवेज को लाखों की चपत

रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को आचार संहिता लगने के साथ ही खत्म हो गई। इसके चलते उनकी मांगों का भी कुछ नहीं हुआ। और फिर से उन्हीं हालात में काम पर लौट आए। जबकि इन 20 दिनों में अकेले कोटा डिपो को करीब दो करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।
2 min read
Oct 07, 2018
kota
roadways

कोटा. रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को खत्म हो गई। रविवार तड़के से बसों का संचालन शुरू हुआ। कोटा से पहली बस तड़के 3.30 बजे बीकानेर के लिए रवाना हुई।
उल्लेखनीय है कि 16 सितम्बर की रात से रोडवेज कर्मचारी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर थे। जिससे प्रदेशभर में रोडवेज का संचालन नहीं हो रहा था। लोगों को परेशानियां उठानी पड़ रही थी। हड़ताल टूटने के बाद फिर से बसों में रवानगी आ गई। वहीं 20 दिनों से धरने पर बैठे कर्मचारियों ने फिर से ड्राइवर व कण्डक्टर की सीट को संभाल लिया है। चालक दुर्गाशंकर ने बताया कि बसों के चलने का सभी को इंतजार था। मोर्चा के संभागीय अध्यक्ष राधेमोहन, महासचिव राजू लाल सिंधी ने बताया कि आचार संहिता लगने के कारण कर्मचारी हड़ताल पर लौटे हैं। आचार संहिता हटने के बाद आगामी रूपरेखा तैयार की जाएगी। इससे पूर्व जैसे की कर्मचारियों की हड़ताल खत्म हुई कई स्थानों से रात को चलने वाली बसें रवाना हो गई। वहीं कई कर्मचारी अपनी बसों की सार संभाल करते नजर आए। उन्होंने बसों पर छाया धूल हटाई।

खाली रही रोडवेज
गत दिनों से चल रही हड़ताल के टूटने का पता अभी तक कई लोगों को नहीं चल सका है। हालांकि बस स्टैंडों पर कुछ रौनक नजर आई, लेकिन अधिकतर बसों में गिनती के यात्रियों ने सफर किया। इंटक के पदाधिकारी गिरधारी लाल सांखला ने बताया कि लोगों को पता चलने के बाद ही बसों में यात्री आएंगे। विभाग के मुख्य प्रबंधक जावेद अली हाशमी ने बताया कि हड़ताल टूटने के बाद पहले दिन कितना राजस्व मिला इसका पता सोमवार को ही चल सकेगा।

दो करोड़ का नुकसान
हड़ताल टूटने से रोडवेज कर्मचारियों की मांगे जहां की जहां रह गई। वहीं रोडवेज को अकेले कोटा डिपो से प्रतिदिन के औसतन राजस्व 10 लाख के हिसाब से करीब 2 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। इसका फायदा निजी बस संचालकों व यातायात के अन्य साधनों ने उठाया।

Updated on:
07 Oct 2018 05:58 pm
Published on:
07 Oct 2018 05:58 pm