
कोटा . साब सर्दी बहुत पड़ रही है, मजदूरी भी नहीं मिल रही, ऐसे में कहां जाए। बिना मौसम बरसात ने परेशानी और बढा दी है। हम तो कहीं भी रह लें साहब, लेकिन छोटे बच्चों का क्या करें। सर्दी में कहां कहां लिए भटकें। रेन बसेरे दिन में भी खुलवा दो। ज्यादा नहीं थोड़ी सी जगह मिल जाए और एक अदद रजाई। बस गुजारा कर लेंगे। ये पीड़ा है कोटा में दूरदराज से मजदूरी करने आए लोगों की। शहर में रैन बसेरे अब तक व्यवस्थित नहीं हो पाए हैं। अस्थाई रैन बसेरों में गिने-चुने साधन हैं। 10 से 11वां आ जाए तो एक को बैठना पड़ता है। ऐसे में कई मजदूर सर्दी में ठिठुरते रहते हैं। पत्रिका संवाददाता ने पूछा तो मायूसी से बोले - साब जब तक सर्दी तेज पड़ रही है तब तक दिन में भी रैन बसेरों को खोलना चाहिए।
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बिना आईडी देखे मजदूरी मिल जाती है, लेकिन रात गुजारने की जगह नहीं
कोटडी स्टील ब्रिज के पास बने अस्थाई रैन बसेरे के पास खुले में कंबल लपेटे मंडाना निवासी महावीर ने बताया कि बजरी पर रोक लगने से मजदूरी भी कम हो गई है। रात में रैन बसेरे में तब तक नहीं जाने देते जब तक कोई आईडी नहीं हो। कई मजदूरों के पास आईडी नहीं है, उन्हें रात में बाहर ही सोना पड़ रहा। कुछ मजदूर राजस्थान के बाहर के हैं। वो राजू महाराष्ट्र से मजदूरी की तलाश में यहां आया है। बीमार है, उसे भी रेन बसेरे में सोने नहीं दिया जाता।
अलाव का सहारा
खुले में सोने को मजबूर मजदूर अलाव जलाकर सर्दी से राहत पाने का जतन करते दिखाए दिए। कई लोगों ने लकडिय़ों की व्यवस्था नहीं होने पर कागज, पॉलीथिन, बोरियों तक को आग के हवाले कर दिया।
बादल छंटेंगे तो सर्दी और बढ़ेगी
मौसम विभाग के अनुसार 7 से 10 दिसम्बर तक मौसम साफ रहेगा। बादल छट जाएंगे। हालांकि बरसात होने से सर्दी का असर रहेगा। 10 दिसम्बर तक आसमान साफ रहेगा।