कोटा

राजस्‍थान के इन जि‍लों के कि‍सान नहीं ले सकेंगे सहकारी बैंक से loan, जानि‍ए यह है वजह

राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक (एसएलडीबी) ने 36 प्राथमिक सहकारी बैंकों (पीएलडीबी) में से 30 पर किसानों को तत्काल ऋण देने पर रोक लगा दी है।
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Jun 14, 2018
farmer
OMG: सरकार ने 30 बैंकों को आदेश जारी कर किसानों को ऋण देने से किया मना

कोटा. किसानों से ऋण वसूली में फेल होने से प्रदेश के सहकारी बैंकों का घाटा लगातार बढ़ रहा। प्रदेश के 30 सहकारी भूमि विकास बैंकों का 700 करोड़ से अधिक का ऋण अवधिपार (ओवर ड्यूज) हो गया है। ऐसे में राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक (एसएलडीबी) ने 36 प्राथमिक सहकारी बैंकों (पीएलडीबी) में से 30 पर किसानों को तत्काल ऋण देने पर रोक लगा दी है।

इसमें कोटा, बूंदी, बारां तथा झालावाड़ जिले के प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक भी शामिल हैं। इनके सदस्यों को खरीफ के लिए ऋण नहीं मिलेगा। 36 सहकारी भूमि विकास बैंकों के 79 हजार 923 सदस्य डिफाल्टर हो गए हैं। बैंक प्रबंधन वसूली नहीं कर पा रहा।

सरकार ने ऋणी सदस्यों को बकाया जमा कराने के लिए एकमुश्त समझौता योजना भी चलाई, लेकिन ज्यादार किसानों ने इसमें रूचि नहीं ली।


केवल ये बैंक बांट सकेंगे लोन
प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक नागौर, बीकानेर, बालोतरा, बिलाड़ा, जोधपुर एवं चित्तौडगढ़ कर्ज बांट सकेंगे। एसएलडीबी ने दीर्घकालीन ऋण ब्याज दरें भी बढ़ाकर 12 प्रतिशत के बजाय 12.85 प्रतिशत कर दी है।

यहां औसत से कम वसूली कोटा, बूंदी, बूंदी, हिण्डौन, जैसलमेर, जयपुर, उदयपुर, सवाईमाधोपुर, प्रतापगढ़, भरतपुर, धौलपुर, सिरोही, टोंक, डूंगरपुर, बांसवाडा, पाली एवं जालौर भूमि विकास बैंकों की वसूली औसत 6.89 प्रतिशत से भी कम रही है।

वि‍त्तीय अनुशासनहीनता मानी
एसएलडीबी के प्रबंध निदेशक विजयकुमार शर्मा ने सभी प्राथमिक बैंकों के सचिवों को पत्र भेज वसूली लक्ष्य पूरा नहीं करने के बावजूद ऋण बांटने को वित्तीय अनुशासनहीनता बताया। कहा कि बैंक ऋणियों से वसूली राशि को राज्य बैंक को 'पासऑन' नहीं कराकर, इसका उपयोग ऋण वितरण में कर रहे हैं, यह वित्तीय अनुशासनहीनता है।

वसूली पासऑन नहीं कराने से राज्य बैंक में फण्ड्स में गिरावट है। नाबार्ड की संभावित मांग राशि 235 करोड़ का चुकारा न करने की स्थिति में राज्य बैंक के डिफाल्टर होने का खतरा है।

वीके शर्मा, राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक के एमडी, का कहना है की तीस प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों की रिकवरी बहुत थी, फिर भी ऋण वितरण किया जा रहा था। यदि ऋण बांटते रहे और नाबार्ड में राशि जमा नहीं करवाई गई तो डिफाल्टर हो जाएंगे। इसके लिए ऋण वितरण पर रोक लगाई है।

Published on:
14 Jun 2018 02:41 pm