
कोटा. हजारों लोग अपने दिन की शुरुआत 'भगवान', के दर पर माथा टेककर करते थे, वही 'भगवान' वर्षों से थानों में बंद हैं, वह भी बिना किसी जुर्म के! यहां बात हो रही है कोटा संभाग के कई थानों में रखी आस्था की प्रतीक देवी-देवताओं की मूर्तियों की। कहीं 30 तो कहीं 18 साल से मूर्तियां मालखाने में रखी हुई हैं। जब तक मंदिर में थीं, हजारों लोग इनके सामने माथा टेकते, लेकिन अब इनके माथे पर ही धूल चढ़ गई है।
हाड़ौती के 98 पुलिस थानों में 84 देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी हैं। यह अपने सही स्थान के लिए श्रद्धालुओं को पुकारती नजर आती हैं। कहते हैं, भगवान की मूर्ति की ओर पीठ करके नहीं बैठना चाहिए, लेकिन थानों में ज्यादातर प्रतिमाएं तो बेरूखी की शिकार है। देव प्रतिमाओं की यह हालत चोरों और तस्करों ने की है। इन्हीं से बरामद की गई ये प्रतिमाएं हैं।
Read More: आईबी ऑफिसर की जिंदगी की कीमत सिर्फ 20 हजार
झालावाड़ (झालरापाटन थाना) : माथे पर अब तिलक नहीं, धूल
मांगरोल थाना : चाकू-तलवारों के बीच दबे भोलेनाथ
बमोरीकलां गांव के कुएं से पुलिस ने 25 मई 1994 लाल पत्थर की शिव-पार्वती की प्राचीन मूर्ति बरामद की। 2 दिसम्बर 1999 को भटवाड़ा गांव के पास लावारिस हालत में भगवान शंकर-पार्वती की प्रतिमाएं मिली। 26 जुलाई 2006 में बोहत गांव से गणेश की दो प्रतिमाएं कुएं से बरामद की गई। तब से ही भगवान मालखाने में हथियारों के बीच दबे हुए हैं।
मोठपुर-हरनावदा थाना : वनवास की जगह थाने पहुंचे 'राम'
मोतीपुरा दांता गांव में जुलाई 2001 में विष्णु भगवान की 3 फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा व दो अन्य देवताओं की मूर्तियां लावारिस हालत मिली। वहीं, खेत में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता की वनवास जाने की छवि वाली प्रतिमा बरामद की गई। इसके अलावा हरनावदाशाह थाने में गौतम बुद्ध, विष्णु, दो जैन सहित 8 देव प्रतिमाएं ताले में बंद हैं।
सिंदूरी रंग हुआ मटमैला
महावीर नगर थाने में 18 साल से भगवान गणेश, गौतम बुद्ध, बह्मा, कार्तिक, शिवलिंग और नंदी की प्राचीन मूर्तियां रखी हैं। मालग्रह में धूल-मिट्टी ने मूर्ति का सिंदूरी रंग मटमैला कर दिया। ये मूर्तियां वर्ष 1999 में महावीर नगर तृतीय चौराहे से आरोपित गंगाबाई से बरामद की थी। इन्हें चंद्रेसल मठ से चुराया गया था। इसी तरह भीमगंजमंडी थाने में विष्णु भगवान की दो और रेलवे कॉलोनी थाने में तीन भगवान भक्तों की राह देख रहे हैं।