
कोटा. रेलवे की ओर से यात्रियों का सफर बदबू मुक्त करने के लिए वर्ष 2019 में करीब 17 हजार 500 डिब्बों में जैविक शौचालय लगाने की कार्ययोजना पर कार्य शुरू किया गया है। एक जैविक शौचालय लगाने पर 1 लाख रुपए का खर्च आएगा। इस तरह एक कोच में चार शौचालय बनाने पर करीब 4 लाख रुपए खर्च होंगे। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब सवारी डिब्बा उत्पादन इकाइयों के अलावा मध्यावती मरम्मत और आवधिक सर्विस के दौरान मंडलों की स्थानीय कार्यशालाओं में भी स्थापित किया जाएगा।
पश्चिम मध्य रेलवे को 2016-17 में 2850 जैविक शौचालय लगाने का लक्ष्य दिया था, इसके मुकाबाले 2971 शौचालय लगाए गए। इस कार्य पर 26.15 करोड़ रुपए खर्च हुए। 2017-18 में 1600 के मुकबाले 3886 कोचों में जैव शौचालय लगाए गए। इन पर 118.9 करोड़ रुपए खर्च हुए। कोटा मंडल से गुजरने वाली इंदौर-सराय रोहिल्ला इंटरसिटी, कोटा-उधमपुर एक्प्रेस सहित कई ट्रेनों में जैव शौचालय लगाए जा चुके हैं। कोटा मंडल के करीब 300 कोचों में इस तरह के शौचालय फिट किए जा चुके हैं।
बदबू से यात्री रहते हैं परेशान
ट्रेनों में सफर के दौरान यात्री शौचालय की बदबू से काफी परेशान रहते हैं। नियमित साफ-सफाई नहीं होने से कई बार लोगों का कोच में रुकना तक मुश्किल हो जाता है। रेलवे प्रशासन जैविक शौचालय बनाकर यात्रियों को समस्या से राहत दिलाने का प्रयास कर रही है। जैविक शौचालय लगवाने में रेलवे करीब 4 लाख रुपए खर्च कर रहा है।
कोटा-जबलपुर एक्सप्रेस का मार्ग बदलेगा
कोटा. पश्चिम मध्य रेलवे की सात जोड़ी यात्री गाडिय़ों को स्थाई रूप से परिवर्तित मार्ग से कटनी साऊथ-कटनी मुड़वारा जंक्शन होकर चलाया जाएगा। इनमें कोटा-जबलपुर-कोटा एक्सप्रेस भी शामिल है। आगामी 20 सितम्बर से यह बदलाव होगा।