बताए गए पते पर नहीं मिले अभिभावक, अस्थाई आश्रय गृह में भर्ती करवाया
कोटा. 8 वर्षों पहले जिस बालक को मानसिक रूप से कमजोर मानकर माता-पिता ने निराश्रित छोड दिया, अब बाल कल्याण समिति की काउंसलिग के बाद वो सामान्य निकला। बालक ने बरसों पहले छोड़े गए अपने घर और माता-पिता की जानकारी समिति को बता दी, हालांकि अभिभावकों का पता नहीं चल सका ।
बालक का आईक्यू लेवल टेस्ट करवाने पर वह सामान्य निकला, वह काफी डरा होने से असामान्य व्यवहार करता रहा। समिति ने उसे आश्रय दिलवाकर उसकी पढ़ाई के निर्देश दिए। समिति के सदस्य विमल जैन ने बताया कि एक बालक को उसके माता-पिता ने वर्ष 2012 में रतलाम सब्जीमंडी में निराश्रित छोड़ दिया, जहां से उसे चाइल्ड लाइन द्वारा रतलाम बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। आयु में काफी छोटा होने के कारण वह काउंसलिंग में कुछ बता नहीं पा रहा था। उसके बड़े होने व लगातार काउंसलिंग के बाद उसने स्वयं को कोटा का होना बताया। उससे बातचीत करने पर बालक के पिता का नाम दादाबाड़ी निवासी बजरंग लाल बैरवा और मां का नाम उषा बैरवा बताया। बालक की कोटा में जून से काउंसलिंग के बाद विमंदित गृह मे आश्रय दिया गया। गंगा विजन विमंदित गृह द्वारा बालक से पूछताछ की गई एंव बालक को दादाबाड़ी लोकेशन की जांच करने के लिए लेकर गए, लेकिन उसके माता पिता का कहीं पता नहीं लग पाया।
बालक के आईक्यू लेवल का टेस्ट करवाया गया, तो वह सामान्य बालक निकला। बालक आगे पढऩा चाहता है। बाल कल्याण समिति ने मधु स्मृति संस्थान में आश्रय के आदेश दिए।