
कोटा . शहर में शीघ्र ही महिलाएं ऑटो चलाती दिखेंगी, इन ऑटो का रंग पिंक होगा। इनमें सिर्फ महिलाओं को ही सवारी के रूप में बैठाया जाएगा। यदि किसी महिला के साथ सवारी के रूप में पुरूष साथ होंगे तो उन्हें बैठा लिया जाएगा।
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केवल पुरूष वर्ग इस ऑटो में सवारी नहीं कर सकेंगे। महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने के लिए यह पहल कोटा ऑटो ड्राइवर यूनियन ने की है। अभी 11 महिलाएं ऑटो चलाना सीख रही हैं। हरियाणा, गुजरात व साउथ में इस तरह के ऑटो चलाए जाते हैं।
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घायलों को भी पहुंचाएंगी अस्पताल
यूनियन अध्यक्ष अनीस राइन ने बताया कि पिंक ऑटो चालक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिला को कहीं भी कोई घायल व्यक्ति दिखाई देगा तो उसे वह अस्पताल तक पहुंचाएंगी और इलाज भी कराएंगी। महिला चालकों को इसके लिए सीपीआर की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इन ऑटो में प्राथमिक उपचार के सभी संसाधन होंगे। शुरूआत 11 ऑटो से की जाएगी, इसके बाद 51 ऑटो शहर में चलाए जाने का लक्ष्य है।
ये महिलाएं चलाएंगी पिंक ऑटो
पिंक ऑटो को सबा, शबनम, रेखा बोराई, हेमलता, शबाना, अर्चना सक्सेना, सना, कांती बाई, आरती बाई, रानी पंवार व हीना चलाएंगी। इन सभी महिलाओं को राष्ट्रीय शहरी अजीविका मिशन से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है।
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अभी चलते हैं 300 ऑटो एम्बुलेंस
यूनियन के सचिव भूपेन्द्र सक्सेना ने बताया कि कोटा में ऑटो एम्बुलेंस की सुविधा केवल 11 ऑटो से की गई थी लेकिन अब 300 ऑटो लोगों की जान बचा रहे हैं। पिछले चार माह में 84 दुर्घटनाओं में 90 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि कोटा में 250 ऑटो चालक सीपीआर व प्राथमिक उपचार की टे्रनिंग ले चुके हैं।