
Rahul Gandhi Students Interaction in Kota: कोटा: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को दशहरा मैदान के श्रीराम रंगमंच पर आयोजित 'छात्रों की गूंज, कोटा महारैली' को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं और उनके भविष्य से जुड़ा मंच है। मैं भाजपा, कांग्रेस, राजनीति या चुनाव की बात नहीं करेंगे, बल्कि छात्रों की चुनौतियों और संघर्षों पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी वे युवाओं से पूछते थे कि वे क्या बनना चाहते हैं, तो अधिकांश जवाब इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, आईएएस या सेना से जुड़े होते थे। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था युवाओं को सीमित विकल्प ही क्यों देती है और उनके सामने नए अवसर क्यों नहीं खोल पाती?
सवाल: आपको फ्री छोड़ दिया जाता तो आप क्या बनते?
छात्रा बोलीं: मुझे डॉक्टर-इंजीनियर नहीं, डांसर बनना था।
सवाल: आपने इंजीनियरिंग क्यों चुना?
सौम्याः ताकि मुझे एक्सपोजर मिले। आईआईटी दिल्ली या मुम्बई जैसे अच्छे इंस्टीट्यूट हैं। वहां कई अवसर मिलते हैं।
हिमांशु डांगी: मैं नीट की तैयारी कर रहा हूं।
सवाल: आप नीट की तैयारी क्यों कर रहे हो?
हिमांशुः डॉक्टर बहुत बड़ा टर्म है। कोई आदमी बीमार हो गया तो उसकी लाइफ हमारे हाथ में होती है। नीट का पेपर लीक होने से पूरी होप टूट गई है। स्टूडेंट दो-तीन साल तैयारी करते हैं, लेकिन जब पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो उनकी उम्मीद टूट जाती है।
सवाल: नीट की तैयारी में कितना खर्च आता है?
हिमांशुः एक-डेढ़ लाख रुपए कोचिंग फीस, दस हजार रुपए हॉस्टल किराया और अन्य खर्च मिलाकर सालाना करीब चार लाख बैठ जाते हैं।
हंसवीः मैं सामाजिक हूं। मैं यूपीएससी करके प्रशासनिक अधिकारी इसलिए बनना चाहती हूं कि पॉलिसी बनाकर समाज की सेवा कर सकूं।
सवाल: बेटी का सपना कैसे पूरा करेंगे?
पिता नरेशः मेडिकल सेक्टर में प्राइवेट जॉब करता हूं। बमुश्किल मकान बनाया है, लेकिन वह उनकी बेटी भावना महावर का यूपीएससी की तैयारी का सपना पूरा करेंगे। भले ही इसके लिए उन्हें अपना मकान ही क्यों न बेचना पड़े।
सवाल: आपके सामने बड़ा चैलेंज है, आपकी क्या फिलिंग है?
बेटी भावनाः परिजन का त्याग देखकर उन्हें तैयारी और सलेक्शन को लेकर डर सताता है। खुद पर तो विश्वास है, लेकिन सिस्टम पर नहीं।
सवाल: आपकी क्या तैयारी है?
मां पार्वतीः बच्चे पढ़ाई को लेकर काफी तनाव में रहते हैं। ऐसे में कई बार आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। ऐसे में हमें भी डर लगता है। ऐसे में हम रात में दो-तीन बार उठकर बेटी को देखते हैं। आंखों की नींद ही उड़ी रहती है।