
कोटा। राजस्थान में अपनी चुनाव यात्रा (Rajasthan Election 2018) के दौरान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी (Dr. Gulab Kothari) ने हाड़ौती के बारां और झालावाड़ में मतदाताओं का मानस टटोला। इस दौरान किसानों का दर्द कई जगह फूटा, उन्होंने स्पष्ट कहा, पूरे परिवार की जिंदगी दावं पर लगी है। राजनीतिक दलों को सिर्फ वोट लेने से मतलब है।
चुनावी यात्रा में कोठारी मेवाड़ के बाद कोटा होते हुए अंता, बारां, खानपुर, झालरापाटन, झालावाड़, और रामगंजमंडी पहुंचे। रास्ते में 9 विधानसभाओं में विभिन्न स्थानों पर लोगों का मानस टटोला। उनसे बातचीत में किसानों को फसलों के उचित दाम नहीं मिलने का मुद्दा सामने आया।
अंता में लोगों ने कहा, पिछले चुनाव की तरह मोदी लहर अब नहीं है। इस बार लग रहा है कि जनता सरकार के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। योजनाएं पूरी तरह लागू नहीं हो पाई। इससे लोगों में नाराजगी है। कई लोगों ने यह भी कहा कि इस चुनाव में खामोशी है। पार्टियां मंदिर-मस्जिद, हिन्दुत्व व विकास के दावों में उलझे हैं। कुछ ने कहा, खामोशी के बीच ही मतदाता तय कर चुका है कि उसे किस ओर जाना है। मतदाताओं का मानना था कि इस बार दलगत भावना से ऊपर उठकर जनादेश आएगा।
अब लोभ में नहीं आते हैं मतदाता
अंता में जब कोठारी ने मतदाताओं से पूछा कि चुनाव में क्या परिवर्तन आया है। चर्चा में यह बात भी सामने आई चुनाव आयोग की सख्ती से माहौल में बदलाव आया है। मतदाता अब लोभ-लालच में नहीं आते। दिव्यांगों के प्रतिनिधियों ने कहा, सरकार ने दिव्यांगों को 7 की जगह 21 वर्गों में बांट दिया, लेकिन सुविधाएं नहीं दी। समाज में बड़ा तबका दिव्यांगजनों का है, पर किसी पार्टी का ध्यान इस वर्ग की ओर नहीं है। किसानों ने यूरिया खाद की किल्लत, थैले का कम वजन होने और दर अधिक होने सहित नहरी पानी से सिंचाई में आने वाली असुविधा की पीड़ा भी बताई। खानपुर में आमजन व प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद में भी कई मुद्दे सामने आए। कई जगह लोगों ने कोठारी का स्वागत किया।
अंतरआत्मा की आवाज से मतदान करें
झालरापाटन में गुलाब कोठारी ने कहा कि पिछले अब तक के चुनाव व इस बार के चुनाव में मुद्दों को लेकर फर्क स्पष्ट नजर आ रहा है। समय परिवर्तन के साथ ही मुद्दे बदले हैं। मतदाता मौन क्यों है? जीवन में मौन धारण करने के कई मायने होते हैं। मौन रहना इस बात का ***** है कि जाति-धर्म को तोडकऱ मतदान किया जाए। 70 वर्षों में पहली बार नई पीढ़ी के मतदाताओं की संख्या बढ़ी है जिसमें 60 प्रतिशत युवा व 40 प्रतिशत बुजुर्ग मतदाता दिखाई दे रहे हैं। सरकारें जनहित के साथ नहीं जुड़ पा रही हैं। इसी को लेकर पत्रिका ने काला कानून व चेंजमेकर और जागो जनमत जैसे अभियान चलाए। इस बार भी चुनाव में कई दलों की सूची में अपराधियों के नाम आए हैं। कितना भी दबाव आए हमारा मत अपराधी को नहीं जाए क्योंकि जहां मतदान करेंगे, वहां हम मत डालने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।
रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र में प्रमुख संगठनों के पदाधिकारियों के साथ कोठारी ने राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की। यहां सामने आया कि वर्तमान सरकार में किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पाया। समर्थन मूल्य पर भी खरीद पूरी नहीं हुई। औने-पौने दाम पर उपज बेचनी पड़ी। पिछली सरकार में सात-आठ हजार रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाला उड़द तीन-चार हजार रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। कमोडिटी बाजार में आभासी तेजी व मन्दी रहती है। कुछ लोगों ने बताया कि नोटबन्दी के बाद जीएसटी ने उद्योग-व्यापार पर दोहरी मार मारी। लगभग चालीस प्रतिशत छोटे उद्योग बन्द हो गए। ऑनलाइन शॉपिंग से छोटे दुकानदारों पर प्रभाव पड़ा। सत्ता परिवर्तन के विषय पर लोगों ने बताया कि इस बार मतदाता चुप्पी साधे है।