
भइया राखी के बंधन को निभाना, इसे न समझों रेशम की डोर, भइया ये तो है बहना का प्यार, इसे हमेशा अपने पास रखना..। कुछ इसी प्यार भरे अंदाज में बहनों ने शुभ मुहूर्त में भाइयों के कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उनके दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने भी उनकी रक्षा का संकल्प लेने के साथ ही उपहार भेंट किए।
शुभ मुहूर्त सुबह 11.6 से शुरू हुआ जो दोपहर 1.44 बजे तक रहा। सुबह से ही बहनें शुभ मुहूर्त का इंतजार करती रही। जैसे ही शुभ घड़ी आई तो बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधकर आजीवन उनकी रक्षा का संकल्प लिया।
रक्षाबंधन पर्व पर बाजारों में दिनभर रौनक दिखाई दी। लोगों ने राखियां व मिठाई की खरीदारी की। शहर के विभिन्न इलाकों में सड़क किनारे सजी धजी राखियों की दुकानों पर भीड़ लगी रही।
महिलाओं ने भाईयों की पसंद के अनुसार रंग-बिरंगी राखियां खरीदी। छोटी-बड़ी सभी दुकानों पर महिलाएं, पुरुष व बच्चे राखियों को पसंद करते दिखाई दिए। ग्राहकों की भीड़ के बीच दुकानदारों को भी फुरसत नहीं मिली। राखियों के साथ मिष्ठान भंडार, उपहार व किराना, कपड़ा बाजार में भी जमकर खरीदारी हुई। दुकानदारों ने मिष्ठान भंडारों को अन्य दिनों की अपेक्षा विशेष रूप से सजाया। मनभावन व विशेष मिठाईयां लोगों को लुभाती रही। उपहारों की दुकानों पर भी खास चहल-पहल रही। लोगों ने परिधान समेत बहनों की पसंद के अन्य उपहार खरीदे।
बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिली
रक्षा बंधन पर सरकार की ओर से रोडवेज बसों में महिलाओं को नि:शुल्क यात्रा करवाई गई। कोटा डिपो से रवाना होने से पहले ही बस खचाखच भर गई। हालात यह हो गए कि बस में पैर रखने तक की जगह नहीं मिली।
सरकार ने रविवार रात 12 से सोमवार रात 12 बजे तक महिलाओं के लिए नि:शुल्क बस सेवा की घोषणा की थी। सोमवार को भारी संख्या में महिलाएं मायके गईं। महिलाओं को बसों में सीट हासिल करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान महिलाओं ने बच्चों को खिड़की से अंदर घुसाकर सीटें हासिल की। ्खचाखच भरी बस में महिलाओं और बच्चों को गर्मी से परेशान होना पड़ा। बसों से चढ़ते-उतरने के दौरान सवारियों में अव्यवस्था का माहौल बना रहा।