
बड़ाखेड़ा.
कस्बे से करीब 6 किलोमीटर दूर चंबल और मेज नदी के संगम क्षेत्र के निकट स्थित पाली गांव का प्राचीन एकमुखी शिवलिंग श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां स्थापित दो दुर्लभ एकमुखी शिवलिंग अपनी अनूठी बनावट और प्राचीनता के कारण विशेष पहचान रखते हैं।
शिवलिंग पर भगवान शिव के शांत एवं सौम्य मुख की स्पष्ट आकृति उकेरी गई है। जटाओं का सुंदर चित्रण इसे और भी विलक्षण बनाता है। शिव का यह दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। महाशिवरात्रि सहित अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार प्राचीन समय में यहां एक भव्य मंदिर हुआ करता था, जो समय के साथ नष्ट हो गया। हालांकि दोनों शिवलिंग आज भी अपने मूल स्वरूप में सुरक्षित हैं। बाद में ग्रामीणों के सहयोग से इन शिवलिंगों को एक छोटे मंदिर में स्थापित किया गया।
ग्रामीण श्याम मीणा, धनराज, नरेन्द्र मीणा का मानना है कि पाली गांव और इसके आसपास आज भी प्राचीन सभ्यता के अनेक अवशेष बिखरे पड़े हैं, जिनके संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है। यदि इस ऐतिहासिक धरोहर का समुचित संरक्षण और प्रचार-प्रसार किया जाए तो यह धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ऐतिहासिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।