एसीबी ने बेटे-बहू और पत्नी के भी खाते किए थे सीज..
कोटा. नारकोटिक्स विभाग राजस्थान के अतिरिक्त आयुक्त डा. सहीराम मीणा के परिजनों ने मंगलवार को एसीबी द्वारा लॉक उनके खातों को मुक्त करने की अर्जी न्यायालय में दाखिल की है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुनील हठीला ने बताया कि डा.सहीराम मीणा के बेटे मनीष मीणा, बहू विजयलक्ष्मी व पत्नी प्रेमलता मीणा की ओर से एसीबी न्यायालय में तीनों के एसीबी द्वारा सीज किए खातों को मुक्त करने अर्जी लगाई है।
इस मामले में न्यायालय ने सुनवाई के लिए 14 मार्च की तारीख मुकर्रर की है।
अधिवक्ता ने हठीला बताया कि एसीबी की धारा 18 के तहत एसीबी को जिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की है। उसके परिजनों के खाते सीज करने का अधिकार नहीं है। यदि अनुसंधान अधिकारी को लगता है कि प्रिवेन्शन ऑफ करप्शन में खातों में अवैधानिक रुपए है। तो वह खातों का निरीक्षण कर सकता है। बैंक प्रबंधन से उन खातों की नकल ले सकता है, लेकिन खातों को सीज नहीं कर सकता। उन्होंने तर्क दिया कि एसीबी की ओर से खातों में रुपयों के आधार पर भ्रष्टाचार सिद्ध नहीं किया जा सकता। एसीबी को आय के स्त्रोत अवैध होना सिद्ध करना होता है। इसके अलावा डा.मीणा केन्द्रीय सरकार के अधिकारी है। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार सीबीआई को है। एसीबी को नहीं। उन्होंने बताया कि इस मामले में एसीबी का ग्राउंड काफी कमजोर है। गौरतलब है कि डा.सहीराम मीणा के चालान पेश करने के लिए 19 मार्च की तारीख मुकर्रर है।
एसीबी न्यायालय ने सोमवार को नारकोटिक्स के राजस्थान के अतिरिक्त आयुक्त डा.सहीराम मीणा व दलाल कमलेश धाकड़ की न्यायिक अभिरक्षा 19 मार्च तक के लिए बढ़ा दी। चम्बल की धरा में और खूबसूरती को चार चाँद लग सकते है, गर गौर लिया इन बातों को एसीबी ने 26 जनवरी दोपहर में सहीराम मीणा व दलाल कमलेश धाकड़ को चीर सावरकर नगर स्थित नारकोटिक्स कॉलोनी स्थित सहीराम मीणा के सरकारी आवास से सर्विलांस की बातचीत के आधार पर ट्रेप किया था। एसीबी ने कमलेश धाकड़ के पिता को नारकोटिक्स विभाग की योजना के तहत कमलेश धाकड़ के पिता को गांव का मुखिया बनाने की ऐवज में एक लाख रुपए लेने की रिश्वत लेते पकड़ा था।