
कोटा. रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को १९ दिन हो गए। एक ओर कर्मचारियों की मांगे और दूसरी ओर सरकार की हठधर्मिता और परेशान जनता। बस स्टैंड व आसपास के दुकानदारों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। दुकानदार तो अब ताले भी नहीं खोल रहे हैं। बस स्टैंड परिसर में संचालित केंटीन पर भी ग्राहक नहीं।
बोले दुकानदार, कुछ नहीं आ रहा समझ
नयापुरा बस स्टैंड पर वर्षों से पान की दुकान लगाने वाले हेमराज धामेजा बताते हैं कि कुछ समझ में नहीं आ रहा है हड़ताल कब टूटेगी। हेमराज ने बताया कि आमतौर पर प्रतिदिन 2500 से 3000 तक की सेल हो जाती है, लेकिन हड़ताल के चलते धंधा ठप है। दुकान का किराया भी जेब से भरना पड़ेगा। केंटीन संचालक शेख अहसान बताते हैं कि हर दिन 1000 से 1500 रुपए की आमदनी हो जाती है, लेकिन अब तो 100 से 150 की भी आमदनी नहीं हो रही। हेयर डे्रसर महेन्द्र सेन बंटी के अनुसार यात्रियों के आने-जाने से हर दिन 700 से 800 रुपए कमा लेता था। अभी तो भूले भटके कोई ग्राहक आ जाए तो ठीक, नहीं तो फालतू बैठे रहते हैं।
आज जाएंगे अजमेर
इधर, डीसीएम रोड स्थित बस स्टैंड पर रोडवेज कर्मचारियों का धरना १९वें दिन भी जारी रहा। राजस्थान रोडवेज श्रमिक संगठन संयुक्त मोर्चा के संभागीय सचिव राजूलाल सिंधी व संभागीय अध्यक्ष राधेमोहन ने बताया कि शनिवार को कर्मचारी अजमेर जाएंगे।
बढ़ रहा नुकसान
रोडवेज को नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है। कोटा डिपो को हर दिन १० लाख के करीब आमदनी होती है। इसके चलते १ करोड़ ९० लाख का नुकसान विभाग को अब तक हो चुका है। अनुमान के तौर पर प्रदेश के ५२ डिपो में प्रतिदिन यात्रियों से पांच करोड़ का नुकसान हो रहा है।
दवा लेने में तीमारदारों के छूटे पसीने
रेडियोग्राफर्स व फार्मासिस्ट ने शुक्रवार को भी सुबह दो घंटे कार्य बहिष्कार किया। इसके चलते अस्पतालों में व्यवस्था चरमरा गई। मरीजों को लम्बा इंतजार करना पड़ा। दोनों जगहों पर लम्बी कतारें लगी रही।
राजस्थान रेडियोग्राफ र्स एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी के आह्वान पर शुरुवार को जिले के 95 रेडियोग्राफर्स सुबह 9 से 11 बजे तक सामूहिक कार्य बहिष्कार पर रहे। एमबीएस अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन तक नहीं चली। जिलाध्यक्ष पंकज शाण्डिल्य ने बताया कि सभी अस्पतालों पर रेडियोग्राफ रों ने कार्य बहिष्कार किया। प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंकज सक्सेना की अगुवाई में अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
दवा काउंटरों पर भीड़
इधर, फार्मासिस्ट ने भी दो घंटे कार्य बहिष्कार किया। इसके चलते अस्पतालों में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा काउंटरों पर भीड़ लगी रही। परेशान मरीज व तीमारदार आपस में ही उलझते दिखे।