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BIG NEWS: डूंगरपुर के बाद कोटा में भी खुला कर्ज माफी का बड़ा घोटाला, 49 किसानों के नाम लाखों का गबन

डूंगरपुर में हुए कर्जमाफी घोटाले के बाद अब कोटा में भी कर्ज माफी में बड़ा घोटाला सामने आया है। सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण उठाया।
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Feb 06, 2019
Scam of Debt Waiver scheme
BIG NEWS: डूंगरपुर के बाद कोटा में भी खुला कर्ज माफी का बड़ा घोटाला, 49 किसानों के नाम लाखों का गबन

रणजीत सिंह सोलंकी@ कोटा.

डूंगरपुर में हुए कर्जमाफी घोटाले के बाद अब कोटा में भी कर्ज माफी में बड़ा घोटाला सामने आया है। सहकारी समितियों के ही कर्मचारियों ने पहले तो किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण उठाया और फिर सरकार की कर्ज माफी का फायदा भी उठा लिया।

सहकारिता विभाग की जांच में फर्जी ऋण उठाने का मामला सामने आने के बाद भी जिम्मेदारों ने आंखें मूंदकर कर्ज माफी में भी प्रकरण शामिल कर लिए। कर्ज माफी के प्रमाण पत्र बांटकर क्लेम के लिए सरकार के पास दावा पत्र भी भेज दिया। विभागीय जांच में गड़बड़झाला साबित होने के बाद उप रजिस्ट्रार के यहां सहकारी अधिनियम की धारा 57 में जांच पूरी कर ली। फैसला सुनाया जाना है। इसमें गबनकर्ताओं से वसूली का निर्धारण किया जाएगा।

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तीन सहकारी समितियों में हुआ घालमेल
डूंगरपुर घोटाले के बाद पत्रिका टीम ने जिले की सहकारी समितियों में कर्ज माफी के आंकड़ों का विश्लेषण किया तो तीन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में 49 किसानों के नाम करीब 34 लाख रुपए का घोटाला सामने आया। जटवाड़ा ग्राम सेवा सहकारी समिति में चार किसानों, खातौली ग्राम सेवा सहकारी समिति में 15 तथा मियाणा ग्राम सेवा सहकारी समिति में 30 किसानों के फर्जी नाम से ऋण उठाया और फिर कर्ज माफी का भी फायदा उठा लिया। इसमें मियाणा के तत्कालीन व्यवस्थापक ईद मोहम्मद व अन्य कर्मचारियों ने घोटाला किया है। घोटाले के मामले में उसे निलम्बित कर दिया गया था और जेल भी गया था।

ऐसे किया गड़बड़झाला
तीनों ग्राम सेवा सहकारी समितियों में तत्कालीन व्यवस्थापक ईद मोहम्मद व अन्य कर्मचारियों ने पहले किसानों के नाम फर्जी तरीके से ऋण उठा लिया। बकाया राशि के नोटिस किसानों के पास गए तो किसानों को पता चला कि उनके नाम बैंक से किसी ने ऋण उठा लिया। इसकी शिकायत पर सहकारिता विभाग ने जांच करवाई थी। जांच में ऋण देना गलत पाया गया था। कर्मचारियों को ही दोषी माना गया था। इसके बावजूद पूववर्ती सरकार की कर्ज माफी 2018 में उनके खातों में कर्ज माफ कर दिया। इस कारण इन खातों में बकाया की डिमांड खत्म हो गई।


केस 1
जटवाड़ी ग्राम सेवा सहकारी समिति की खाता संख्या 723 से राधेश्याम पुत्र प्रेमशंकर महाजन के 35 हजार का ऋण लेना दर्शाया गया। विभागीय जांच में समिति के तत्कालीन व्यस्थापक को ऋण राशि लेने के बाद जमा नहीं कराने का दोषी माना गया। इसके बावजूद इस खाते पर 82518 रुपए की कर्ज माफी कर दी गई, जबकि व्यवस्थापक से वसूली का निर्धारण करने के लिए धारा 57 की कार्रवाई चल रही है।


केस 2
मियाणा ग्राम सेवा सहकारी समिति में रमेश नाम के किसान के खाते में 20 हजार रुपए का गबन किया गया। जांच में पाया किसान की जगह समिति के कर्मचारियों ने गबन किया। इसके बावजूद 41 हजार 666 रुपए की ऋण माफी कर दी गई। खासा संख्या 518 के हीरालाल के खाते में पचास हजार का गबन किया और उसे 36363 रुपए की कर्ज माफी कर दी गई।

तीनों ग्राम सेवा सहकारी समितियों में गबन के मामले में धारा 57 की कार्रवाई चल रही है। तत्कालीन व्यवस्थापक ईदमोहम्मद को सुनवाई के लिए कई बार तलब किया है, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ है। इसका फैसला इसी माह में सुनाया जाएगा। गबन के खातों में ऋण माफी की गई तो वह गलत है।
अजयसिंह पंवार, उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, कोटा

Published on:
06 Feb 2019 10:00 am