
कोटा. रूपहले पर्दे पर अभिनय का जलवा दिखाने की तमन्ना रखते हैं तो आपका यह सपना साकार हो सकता है। महाभारत के भीष्म पितामह और बच्चों में लोकप्रिय शक्तिमान मुकेश खन्ना जल्द कोटा की प्रतिभाओं को निखारकर उनके सपनों को पूरा करने में सहयोगी बनेंंगे। किसी कार्यक्रम में भाग लेने कोटा आए मुकेश खन्ना ने पत्रिका से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह देश में विभिन्न शहरों में अभिनय प्रशिक्षण देने पर विचार कर रहे हैं। जयपुर में भी उन्होंने तीन साल तक एक्टिंग क्लास ली है। कोटा में भी क्लास शुरू करने का विचार है। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं। युवा अभिनय के गुर सीखने के लिए सीधे मुम्बई की ओर रुख करते हैं। इससे वे परिवार से दूर हो जाते हैं। कई बार भटक भी जाते हैं। कॉन्सेप्ट ऑफ एक्टिंग के तहत वे विभिन्न शहरों में इसी उद्देश्य से कक्षाएं ले रहे हैं, ताकि परिवार के साथ रहकर एक्टिंग सीखी जा सके। पत्रिका से उन्होंने फिल्म से लेकर राजनीति व कश्मीर मुद्दे व कोटा पर बात की।
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राजनीति में दुर्योधनों की कमी नहीं
खन्ना ने कहा कि महाभारत के काल में सिर्फ एक दुर्योधन था, आज राजनीति में दुर्योधनों की कमी नहीं। एक मामा शकुनी ने कौरव व पांडवों के बीच युद्ध करवा दिया था, आज कई शकूनी है। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं। आतंकवाद की समस्या से सभी को मिलकर निपटना होगा।
फिल्मों में आवाज का अहम रोल
खन्ना ने कहा कि शक्तिमान को लेकर कोई दिक्कत नहीं आई। सीरियल के अलावा वे फिल्म सौदागर, सौगन्ध व तहलका में निभाई गई भूमिका से संतुष्ट नजर आए। लोगों ने इन फिल्मों में उनकी भूमिका को काफी सराहा है। वह फिल्मों में आवाज का अहम रोल मानते हैं। आवाज पर एक्सरसाइज जरूरी है। इस मौके पर ब्यूटीशियन नीता पारेख व इंटरनेशनल हेयर डिजाइनर हरीश भाटिया भी उनके साथ उपस्थित थे।
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कोटा की पहचान कोचिंग से
एक सवाल के जवाब में खन्ना ने कहा कि कोटा की पहचान कोचिंग से है। कोचिग का मतलब कोटा, कोटा का मतलब कोचिंग है। कोई भी व्यक्ति कोटा आता है तो कोचिंग ही जहन में आता है। महाभारत में भीष्म के किरदार को लेकर कहा कि एेसा रोल अब दोबारा करना संभव नहीं। मैं भी नहीं जानता कैसे हुआ। महाभारत वह बचपन से पढ़ते थे, इसलिए किरदार को समझाने में दिक्कत नहीं आई। संवाद शैली की जहां तक बात हैं, इसमें संवाद लेखक पर भी निर्भर करता है। उन्होंने डॉ. राही मासूम रजा की तारीफ की।