
कोटा . बरसात के दिनों में शहर में आए दिन मगरमच्छ निकलते रहते हैं। जंगल से भी रहवासी इलाकों में अन्य जीव आ जाते हैं, इससे लोगों को भी परेशानी होती है, वहीं कई बार इन जीवों को रखने के लिए उपयुक्त साधन व जगह नहीं होने से काफी मुश्किल आती है।
अब मगरमच्छ समेत अन्य वन्यजीवों को रखने व इलाज के लिए चिडिय़ाघर में रेस्क्यू सेंटर बनाया गया है।शहर में नाले, पानी भरे भूखंडों व नहरों से मगरमच्छ, जंगल क्षेत्र से घायल हरिण तथा अन्य वन्यजीव रहवासी इलाकों में आ जाते हैं इसके अलग-अलग हिस्सों में यहां कर लाए गए जीवों का इलाज किया जा सकेगा, आवश्यकता पडऩे पर देखरेख में रखा भी जा सकेगा।
हर साल आते हैं मामले
शहर में नाले, पानी भरे भूखंडों व नहरों से मगरमच्छ, जंगल क्षेत्र से घायल हरिण तथा अन्य वन्यजीव रहवासी इलाकों में आ जाते हैं। लाडपुरा रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी दाताराम के अनुसार बरसात में गत वर्ष 40 से 45 मगरमच्छ रहवासी इलाकों में आ गए थे, जिन्हें विभाग ने रेस्क्यू किया।
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इनके अलावा दर्जन भर से अधिक चिंकारे, चीतल, 10 से 15 अजगर भी आए। इसके अलावा महीने में 2-3 सूचनाएं राष्ट्रीय पक्षी मोर के घायल होने की आ जाती हैं।
ऐसा बनाया सेंटर
क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक जासू के अनुसार चिडिय़ाघर में मगरमच्छ को रखने के लिए 360 वर्ग मीटर का सेंटर बनाया गया है। इसमें बीच में पानी भरने की व्यवस्था की है।
कहीं रात-बेरात कोई मगरमच्छ आ जाए तो इसमें रखा जा सकता है। इसके अलावा हरिण व नीलगाय जैसे वन्यजीवों के लिए भी रेस्क्यू सेंटर में 600 वर्गमीटर क्षेत्र अलग से बनाया गया है।