टीबी का इलाज की कड़वाहट अब खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही कई अलग-अलग गोलियां खाने से भी मरीजों को छुटकारा मिलेगा।
टीबी से ग्रस्त रोगियों को अब अलग-अलग गोलियां लेने की जरूरत नहीं होगी। टीबी उपचार के सभी साल्ट एक ही गोली में डाले गए हैं। टीबी के नए मिलने वाले रोगियों का उपचार अब इसी गोली के माध्यम से किया जाएगा। जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों पर यह गोली उपलब्ध रहेगी। इसके साथ ही दवाई की कड़वाहट खत्म करने के लिए मरीजों को मीठी और फ्लेवर्ड गोलियां दी जाएंगी।
एक ही गोली में मिलेंगे सभी सॉल्ट
बूंदी के सीएमएचओ डॉ.सुरेश चंद जैन ने बताया कि इससे पहले टीबी के रोगियों को उपचार के लिए अलग-अलग साल्ट की कई गोलियों का सेवन करना पड़ रहा था, लेकिन अब एक ही गोली इजाद की है।जिसमें टीबी उपचार के सभी साल्ट हैं। ऐसे में मरीजों को रोजाना अलग-अलग कई गोलियों के सेवन से निजात मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों, आशा वर्करों और डॉट टीम मरीजों को यह गोली घर पर जाकर उपलब्ध करवाएगी।
कई फ्लेवर्स में उपलब्ध
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. देवेन्द्र माथुर ने बताया कि टीबी के मरीजों को अब कड़वी दवाई से भी छुटकारा मिल जाएगा। टीबी के इलाज में दी जाने वाली गोलियां अब चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी के साथ-साथ कई फ्लेवर्स में उपलब्ध होंगी, जिससे बच्चे भी आसानी से गोली ले सकें।उन्होंने बताया कि यह गोली जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध करवा दी गई। आशा वर्कर व स्वास्थ्य कर्मचारियों को निर्देश दिए कि टीबी के ग्रस्त मरीजों को उपचार के लिए यह गोली घर पर मुहैया करवाई जाए। उन्होंने बताया कि टीबी के नए मिलने वाले मरीजों का उपचार भी इसी गोली से किया जाएगा।
वजन के हिसाब से दी जाएगी दवा
टीबी के रोगियों को वजन के हिसाब से 25 से 39 किलोग्राम के व्यक्ति को प्रतिदिन दो गोली, 40 से 54 किलोग्राम के व्यक्ति को तीन गोली, 55 से 6 9 किलोग्राम के व्यक्ति को चार गोली और 70 से ऊपर के व्यक्ति को पांच गोली प्रतिदिन के हिसाब से लेनी होंगी। इसी प्रकार से बच्चों में चार से सात किलोग्राम के बच्चे को दो गोली, आठ से 11 किलोग्राम के बच्चे को चार गोली, 12 से 15 किलोग्राम के बच्चे को छह गोली, 16 से 24 किलोग्राम के बच्चे को आठ गोली, 25 से 29 किलोग्राम के बच्चे को सात गोली और 30 से 39 किलोग्राम के बच्चे को छह गोली का सेवन प्रतिदिन के हिसाब से करना होगा।