कोटा

राजस्थान के मार्केट पर भी पड़ रहा अमरीका-ईरान विवाद का असर, बासमती चावल का निर्यात ठप, गिरे दाम

देश में बासमती चावल का बंपर उत्पादन होने के चलते केंद्र सरकार ने हाल ही निर्यात नियमों में सरलीकरण किया था। इसके बाद चावल के दाम बढ़े थे और किसानों को उचित मूल्य मिलने लगा था। लेकिन, अब एकाएक दाम गिरने से किसान सकते में आ गए हैं।

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Jan 13, 2026
भामाशाहमंडी धान से अटी हुई है और इनसेट में निर्यात के लिए एक कारखाने में पड़ा बासमती चावल (फोटो: पत्रिका)

US-Iran Conflict Impact In Rajasthan: ईरान के मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक हालात की आंच अब हाड़ौती अंचल तक पहुंच गई है। ईरान में जारी अस्थिरता के चलते वहां के आयातकों और भारतीय निर्यातकों ने हाथ खींच लिए हैं। इसका सीधा असर हाड़ौती क्षेत्र पर पड़ा है, जहां से बड़ी मात्रा में बासमती चावल का निर्यात होता है। हाड़ौती से होने वाला बासमती चावल का निर्यात लगभग ठप हो गया है। बंदरगाहों पर चावल का स्टॉक पड़ा हुआ है और नए निर्यात सौदे नहीं हो पा रहे हैं। इसके चलते पिछले तीन-चार दिनों में धान (चावल) के दामों में 500 से 600 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट आ गई है। इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।


गौरतलब है कि देश में बासमती चावल का बंपर उत्पादन होने के चलते केंद्र सरकार ने हाल ही निर्यात नियमों में सरलीकरण किया था। इसके बाद चावल के दाम बढ़े थे और किसानों को उचित मूल्य मिलने लगा था। लेकिन, अब एकाएक दाम गिरने से किसान सकते में आ गए हैं। यहां के बड़े निर्यातक स्थानीय किसानों से चावल खरीदकर विदेशों में निर्यात करते हैं।

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7 लाख मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन


हाड़ौती में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान 2 लाख 30 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की बुवाई हुई थी, जो पिछले एक दशक में सर्वाधिक है। इस साल सात से आठ लाख मीट्रिक टन धान उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। प्रदेश के कुल धान उत्पादन में कोटा संभाग की हिस्सेदारी करीब 51 प्रतिशत है। यहां उत्पादित बासमती चावल का लगभग 90 फीसदी निर्यात किया जाता है। चमकीला, गुणवत्तायुक्त और खुशबूदार होने के कारण हाड़ौती के बासमती चावल की विदेशों में खास मांग रहती है। ईरान, ईराक सहित खाड़ी देशों में यहां का चावल निर्यात होता है, जो फिलहाल पूरी तरह प्रभावित हो गया है। निर्यातक ईरान के मौजूदा हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

निर्यातकों के करोड़ों रुपए फंसे

निर्यातकों का कहना है कि ईरान पर अमरीकी प्रतिबंध, ईरानी मुद्रा रियाल में भारी गिरावट और खाद्य आयात पर सब्सिडी समाप्त किए जाने के कारण भारत से बासमती चावल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। करीब 2,000 करोड़ रुपए के शिपमेंट फंसे हुए हैं, जिससे निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है। अमरीकी प्रतिबंधों के चलते ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हो गई है। इससे ईरान के लिए भारतीय बासमती चावल का आयात महंगा हो गया है। वहीं, ईरान सरकार द्वारा खाद्य आयात पर दी जाने वाली सब्सिडी समाप्त करने से कीमतें और बढ़ गई हैं।


किसानों को झटका

देशभर के किसान संगठनों के दबाव में केंद्र सरकार ने नवंबर में बासमती चावल निर्यात के नियमों का सरलीकरण किया था। इसके बाद किसानों को धान के अच्छे दाम मिलने लगे थे। अब ईरान-अमरीका विवाद के चलते धान के दाम गिरने से किसानों को नुकसान होगा।

  • दशरथ कुमार, किसान नेता

ईरान के मौजूदा हालात के कारण कोटा सहित देश के कई निर्यातकों ने बासमती चावल का निर्यात रोक दिया है। ईरान में आगे हालात कैसे रहते हैं, उसी के आधार पर कारोबार को लेकर निर्णय लिया जाएगा। ईरान का निर्यात प्रभावित होने से धान के दामों में गिरावट आई है।

  • नीलेश पटेल, चावल निर्यातक, कोटा

कोटा संभाग में धान की आवक
(आंकड़े क्विंटल में)

वर्ष 2021-22 : 81,66,902
वर्ष 2022-23: 84,97,129
वर्ष 2023-24: 1,00,53,835
वर्ष 2024-25: 99,81,912 (अप्रेल तक)

(स्रोत: कृषि विपणन बोर्ड)

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Published on:
13 Jan 2026 03:28 pm
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