कोटा

पानी रिसाव से गले स्लूज गेट, बांध को खतरा

- सरकारी उदासीनता, दुर्दशा पर आंसू बहा रहा राणा प्रताप सागर बांध....
2 min read
• •
Updated: 17 Dec 2020, 9:20 PM IST
rawatbhata
रावतभाटा का राणा प्रताप सागर बांध।

रावतभाटा. अणुनगरी के नाम प्रसिद्ध रावतभाटा स्थित राणा प्रताप सागर बांध सरकार व प्रशासन की उदासीनता के चलते अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा हैं। राज्य के सबसे बड़े इस बांध के रखरखाव पर किसी का ध्यान नहीं है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 34 वर्ष बाद भी सरकार व प्रशासन बांध के स्लूज गेट नहीं खोल पाया। ऐसे में स्लूज गेट ही गल गए और अब इनसे पानी रिसने लगा है। जिससे बांध को खतरा बना हुआ है।

अटक गए गेट
1986 में आखिरी बार बांध के स्लूज गेट खुले थे। बांध में भारी मात्रा में गाद जमा होने से बांध को भी खतरा बढ़ रहा है। स्लूज गेटों को खोलने से लेकर बांध के रखरखाव का खर्च 5 करोड़ से कम आंका गया था, लेकिन काम नहीं हो सका।


आरएपीपी की लाइफ लाइन
राणा प्रताप सागर बांध को आरएपीपी की लाइफ लाइन भी कहा जा सकता है। चंबल नदी पर बने इस बांध के पानी से ही आरएपीपी में परमाणु बिजलीघर के संयंत्रों का संचालन हो पाता है। इसके बावजूद इसकी हालत सुधारने का बीड़ा लेने वाला कोई नहीं है।

न्यायालय के आदेश के बावजूद निकलते हैं भारी वाहन
न्यायालय ने राणा प्रताप सागर बांध पर भारी वाहनों का निकलना वर्जित कर रखा है। बांध से अलग भारी वाहनों को निकालने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से गौरव पथ के रूप में वैकल्पिक मार्ग भी बनाया गया, लेकिन इसके बावजूद यहां से भारी वाहनों के निकलने में कोई कमी नहीं आई।

चंबल नदी का दूसरा बड़ा बांध
चंबल नदी पर मध्यप्रदेश के भानपुरा के निकट सबसे बड़ा बांध गांधीसागर स्थित है। इसके बाद राजस्थान का सबसे बड़ा बांध चित्तौडगढ़ जिले के रावतभाटा में राणा प्रताप सागर है। इसके बाद बूंदी जिले में जवाहर सागर व कोटा बैराज स्थित है। बांध पर खतरा होने से जवाहर सागर बांध व कोटा बैराज बांधों के अलावा रावतभाटा, कोटा से लेकर धौलपुर तक इसकी जद में आता है। ऐसे में इसके रखरखाव के महत्व को समझा जा सकता है।

राणा प्रताप सागर बांध के रखरखाव के लिए विश्व बैंक से माध्यम से रुपए मिलने पर बजट से बांध का काम करवाया जाएगा।
पूरणचंद मेघवाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग, राणा प्रताप सागर, रावतभाटा

Updated on:
17 Dec 2020, 9:20 PM IST
Published on: