
कोटा. मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व की बाघिन सुल्ताना (एमटी-2) की गर्दन के ऊपरी हिस्से पर घाव हो गए। मानिटरिंग के दौरान इसका पता चला तो सोमवार को बाघिन को ट्रंकोलाइज कर वन अधिकारियों की मौजूदगी में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उसका उपचार किया। अधिकारियों के मुताबिक बाघिन स्वस्थ है। उसे विशेषज्ञों की देखरेख में रखा जाएगा। फिलहाल घाव होने के कारणों का पता नहीं चल सका। गौरतलब है कि पांच दिन पहले बाघ और बाघिन को एक साथ मुकुंदरा में देखा गया था।
पांच दिन पहले नजर आए थे घाव
अधिकारियों के मुताबिक बाघिन की मॉनिटरिंग कर रही टीम को 23 जनवरी को उसके शरीर पर घाव नजर आए थे। इसकी सूचना टीम ने अधिकारियों को दी। इस पर विभाग के चिकित्सकों व अधिकारियों ने उसकी मॉनिटरिंग की। घाव के फोटो लेकर चिकित्सकों से विचार-विमर्श किया। गंभीरता को देखते हुए बाघिन को ट्रंकोलाइज कर उपचार किया। इसके बाद उसे एनक्लोजर में छोड़ा। इस दौरान उप वन संरक्षक टी. मोहन राज व सहायक वन संरक्षक दीपक चौधरी उपस्थित रहे।
दो से तीन घाव
सुल्ताना की गर्दन के ऊपरी हिस्से के अलावा अन्य घाव भी थे। इनमें कीड़े पड़ गए थे। जयपुर से आए डॉ. अरविंद माथुर व वन्यजीव विभाग के चिकित्सक अखिलेश पांड्ेय ने उसका उपचार किया। बाघ के नाखून लगने या संभव है झाडिय़ों के कांटें लगने से घाव हुए हों।
ठीक है बाघिन
मॉनिटरिंग के दौरान टीम को बाघिन एमटी-2 के शरीर पर घाव नजर आए थे। घाव मुश्किल न बन जाएं, इसे देखते हुए उपचार करवाया गया। फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता कि घाव कैसे हुए, इसकी जानकारी ली जा रही है। जंगल में विचरण के दौरान कहीं कुछ चुभ सकता है। हालांकि बाघिन स्वस्थ है।
- घनश्याम शर्मा, फील्ड डारेक्टर, मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व