कोटा

कोटा के ऐसे 20 गांव जहां न पीने को है और न ही फसल के लिए पानी, 70 हजार बीघा जमीन सूखी, बर्बादी की चौखट पर खड़ा किसान

सोना उगलती कोटा की धरती पर एक इलाका ऐसा भी है, जो आज भी पानी के लिए तरस रहा है। किसान बर्बादी के मुहाने पर आ गया है।

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Apr 05, 2018
land dry
Water conservation in the city, no water resources yet acquired

सोना उगलती कोटा की धरती पर एक इलाका ऐसा भी है, जो आज भी पानी के लिए तरस रहा है। किसान बर्बादी के मुहाने पर आ गया है। वे अपनी परेशानी सभी को बता चुके हैं। अपने जनप्रतिनिधियों को, अफसरों को, लेकिन कोई नहीं सुन रहा। जो पहले आश्वासन देते थे, उन्होंने भी मुंह फेर लिया है। किसान भगवान भरोसे है।

पाताल से जल की एक बूंद को ला पाना किसान के लिए सपना साबित हो रहा है। कुछ घरों के हालात यह हैं कि अगले कुछ महीनों में खाने का राशन तक नहीं होगा।

ग्राम पंचायत चौमा मालियान, भाण्डाहेड़ा, रेलगांव व कुराड़ पंचायतों के करीब 20 गांव की 70 हजार बीघा भूृमि में पानी पालात में पहुंच गया है। फसल के लिए तो दूर अब पेयजल का भी संकट खड़ा हो गया है। राजस्थान पत्रिका टीम ने 80 किमी क्षेत्र का दौरा कर किसानों के हाल देखे। चार पंचायतें व 20 गांव में सैंकड़ों किसानों से बात की। हालात इतने विकट हैं कि जमीन ही नहीं अब आंखों का पानी भी सूख गया है।

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फसलें नहीं हो रही
अगर किसान जैसे-तैसे कुछ पैदा भी कर ले तो उसके भाव नहीं मिल रहे हैं, क्योंकि पानी की कमी से फ सल की गुणवत्ता नहीं रहती है। अब किसान आर-पार की लड़ाई का मन बना चुका है। इसके लिए गांव-गांव अलख जगाई जा रही है, घर-घर पीले चावल बांटे जा रहे हैं। इन सभी की एक ही मांग है कि इलाके के लिए लिफ्ट सिंचाई परियोजना स्वीकृत की जाए।

चौमा मालियान : गांव चार चौमा, चौमा बिबु, चौमा कोट, गिरधरपुरा, सदेहड़ी, रामड़ी, डंगावत, बंगोरी।
ग्राम पंचायत भाण्डाहेड़ा : सुधना, टहला, बरघु, कुराड़ी।
ग्राम पंचायत रेलगांव : रेलगांव, हनौतिया।
ग्राम पंचायत कुराड़ : कुराड़, तूमड़ा, ब्रज नगर, ब्रजलिया, धुरेला, खाती खेड़ा, बंधा।

बरसों की समस्या
1990 से इस क्षेत्र के किसानों ने अपने ट्यूबवेल का सहारा लिया तथा टरबाइन सिस्टम, जनरेटर व विद्युत शक्ति के माध्यम से भूमि को सिंचित करने का प्रयास किया। जल स्तर गहराता चला गया। किसान ने कर्ज लेकर पानी लाने का जतन शुरू किया, जो अभी तक जारी है। कर्ज बढ़ता गया। कभी जमीन बिकी तो कभी गहनें, कभी घर तो कभी टै्रक्टर साहूकार का मूल तो क्या ब्याज भी चुका पाना मुश्किल हो गया है।

सवाल राजनीति का तो नहीं
लाडपुरा विधानसभा के गांव अब सिंचित होते चले जा रहे हैं, यहां का जल स्तर बढ़ता जा रहा है। लाडपुरा विधानसभा की धरती सोना उगलने लग गई, वहीं इससे सटी हुई सांगोद विधानसभा की जमीन से पानी 1100 फीट तक पहुंच गया। लाडपुरा में बालापुरा लिफ्ट परियोजना व किशनपुरा लिफ्ट परियोजना शुरू होने से धरती पर फसलें लहरा रही हैं। किसान खुशहाल होने लगा है। कर्ज कम होता चल गया। हर खेत को पानी मिल रहा है।

Published on:
05 Apr 2018 12:55 pm