कोटा

कोटा की 150 कॉलोनियां पानी को तरसी, हर दिन मौत से संघर्ष, नींद खुलते ही बर्तन लेकर दौड़ पड़ते हैं लोग

चंबल किनारे बसा कोटा के लोगों को पीने के पानी के लिए हर रोज जिंदगी दांव पर लगानी पड़ती है। यहां 150 कॉलोनियों के लोग पानी को तरस रहे हैं।
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Apr 24, 2019
Water crisis in kota
Water conservation in the district hospital

कोटा. पहले तो कांधे पर दूर से पानी लेकर आओ, फिर चार मंजिल चढ़ाओ। घर के सारे काम छोड़ो, पहले Water की चिंता करो। भरी गर्मी में ऐसे हालात हैं प्रेम नगर आवासीय योजना के लोगों के हैं। लेकिन मामला सिर्फ प्रेम नगर आवासीय योजना का ही नहीं। शहर की कई बस्तियों के लोग भी Water को तरस रहे हैं। Chambal River किनारे बसे शहर में भी कई बस्तियां तो ऐसी हैं जहां पाइप लाइनें तक नहीं पहुंची। वहीं कई कॉलोनियों में पाइप लाइनें तो है पर पानी समय पर नहीं आता।

जलदाय विभाग की जद में नहीं 150 कॉलोनियां
सूत्रों के अनुसार शहर व आसपास के इलाकों में 150 कॉलोनियां व बस्तियां हैं जहां अभी तक जलदाय विभाग नहीं पहुंच पाया है। इनमें से कहीं टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है, कहीं कॉलोनियों के वासियों को अपने स्तर पर पानी की जुगाड़ करनी पड़ती है। इन कॉलोनियों में कृषि भूमि समेत अन्य बस्तियां हैं।

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प्रेमनगर आवासीय अफोर्डेबल योजना
यहां गत दिनों से पानी के लिए मारामारी मची है। क्षेत्र के वाशिन्दों के अनुसार कॉलोनी में एक दिन छोड़कर दूसरे दिन पानी मिल रहा है। कई घरों में तो पानी नहीं आ रहा। लोगों को दूर से पानी लाना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि पानी दूर से लाकर चार मंजिल चढ़ाना मुश्किल होता है। जलदाय विभाग को शिकायत कर चुके हैं।


हैंडपंप है पर खराब
कॉलोनी में करीब आधा दर्जन हैंडपंप लगे हैं, लेकिन चालू कम ही हैं। इनका पानी पीने जैसा नहीं है। नहाने आदि में उपयोग कर सकते हैं। पीने के लिए तो कैंपर लगवाना पड़ता है या दूर से भरकर लाते हैं।

एक दिन छोड़कर मिल रहा पानी
कॉलोनी की बी ब्लॉक की निवासी काजल बताती हैं कि क्षेत्र में एक दिन छोड़ कर एक दिन मात्र 20 मिनट पानी आता है। लोगों को बाजार से पानी लाकर पीना पड़ता है। क्षेत्र में अधिकतर लोग मजदूर तबके के हैं। इस स्थिति में उनके लिए मुश्किल हो जाती है।

खरीदकर पी रहे हैं पानी
शहजाद जिस ब्लॉक में रहते हैं, वहां पानी आता ही नहीं है। बाहर से पानी मंगवाना पड़ता है। शहजाद बताते हैं कि नौकरी पर जाएं या पहले पानी लाएं। पानी लाकर मोटरों से उपर चढ़ाते हैं तो बिजली का मोटा बिल आता है।

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पानी का जुगाड़ खतरनाक
हालात ये है कि ऊपरी मंजिल पर पानी चढ़ाने के लिए लोगों को मोटरों का सहारा लेना पड़ता है। कई महिलाओं को तो खुद ही लाइटों के तार जोडऩा पड़ता है। सुनीता ने बताया कि घर में कोई नहीं होता है तो क्या करें, पानी तो चाहिए।

इन क्षेत्रों में पहुंच रहे टैंकर
जलदाय विभाग की मानें तो शहर की कई कॉलोनियों में करीब 50 पानी के टैंकर सप्लाई किए जा रहे हैं। इनमें से जेके जलदाय चौकी के तहत आने वाले क्षेत्रों में 8, सूर्य नगर में 1, शांतिनगर में 1, जगपुरा में 2, लखावा, रानपुर 3,पूनिया देवरी 1, रंगबाड़ी 4, अनंतपुरा 5, आवली 8, नयागांव में 5 व रथकांकरा में 1 समेत 49 टैंकर भेजे जा रहे हैं।

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गर्मी में 20 फीसदी बढ़ जाती डिमांड
गर्मी में करीब 20 फीसदी पानी की डिमांड बढ़ जाती है। फिलहाल अकेलगढ़ से 290 से 300 एमएलडी पानी सप्लाई किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक डिमांड के अनुसार फिलहाल पर्याप्त पानी सप्लाई हो रही है। सकतपुरा क्षेत्र स्थित मिनी अकेलगढ से 125 एमएलडी पानी सप्लाई किया जा रहा है।


टैंकर लगवाएं हैं
शहर में जिन क्षेत्रों में पानी की समस्या थी, हमने टैंकर लगवाए हैं। करीब 50 टैकरों की व्यवस्था विभिन्न क्षेत्रों में की है। प्रेमनगर आवासीय योजना नगर विकास न्यास के दायरे में आती है, उन्होंने हमसे उनकी कॉलोनी के लिए जितने पानी की आवश्यकता बताई थी, उससे अधिक दे रहे हैं। कॉलोनी में हमारी ओर से कोई कमी नहीं है।
परितोष गुप्ता, अधिशासी अभियंता, जलदाय विभाग

Updated on:
24 Apr 2019 10:47 am
Published on:
24 Apr 2019 10:47 am