बारां : आउट राइट प्रवेश के चलते सैकड़ों छात्र छात्राएं वंचित
बारां. यूं तो प्रत्येक बालक बालिकाओ को शिक्षा का कानूनी अधिकार दिया गया है। सरकार भी शिक्षा के प्रति प्रेरित करती है। लेकिन यह प्रयास धरातल पर सरकारी दावों से इतर हैं। जिला मुख्यालय स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 99 प्रतिशत अंक लाने वाले विद्यार्थीयो को प्रवेश नहीं मिला। जबकि 36 प्रतिशत अंक वाले विद्यार्थियों को मौका मिल गया। महाविद्यालय द्वारा 20 सितंबर को बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए जारी की गई सूची मैं जब 99 प्रतिशत तक अंक लाने वाले विद्यार्थियों का नाम नजर नहीं आया तो वे खासे मायूस हो गए। वहीं जिले के आदिवासी सहरिया समाज के छात्र, छात्राओं को आउट राइट एडमिशन प्रक्रिया से अवसर मिल गया।
इनका यह है कहना
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत सह सचिव कोमल मीणा ने कहा कि गत वर्ष भी छात्र छात्राओं के साथ अन्याय किया गया था। परिषद इस प्रक्रिया के खिलाफ जयपुर हाईकोर्ट में शीघ्र ही जनहित याचिका दायर करेगी। महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष देवेंद्र चौधरी ने कहा कि एक ओर तो सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बात करती है। वहीं दूसरी ओर जिले में उच्च शिक्षा के लिए नियमित रूप से शिक्षा पाने वाले विद्यार्थी को वंचित किया जा रहा है। जो कि सर्वथा अनुचित है। इसके लिए शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से भेंटकर समस्या से अवगत करवाएगा।
इतनी सीटों पर इतना आरक्षण
महाविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष के लिए कुल 1000 सीटें आरक्षित हैं। जिसमें सामान्य वर्ग के लिए 340, एसटी के लिए 120, एसी के लिए 160, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 210, ईडब्ल्यूएस के लिए 100, एमबीसी के लिए 50 तथा 20 सीटें दिव्यांगजनों व अन्य के लिए आरक्षित हैं। लेकिन महाविद्यालय में करीब 500 सहरिया छात्र, छात्राओं के आवेदन प्राप्त होने पर सामान्य वर्ग के कोटे को खत्म करके 327 तथा एसटी के कोटे में 109 सहरिया छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया गया है। वही 21 सहरिया छात्र-छात्राएं को वेटिंग में रखा गया है।
सहरिया छात्र छात्राओं के लिए आउट राइट एडमिशन दिए गए हैं, ये प्रवेश नीति के अनुरूप हैं। प्रवेश सूची भी आयुक्तालय द्वारा जारी की गई है। हमने तो सिर्फ यहां चस्पा किया है। इसमें स्थानीय स्तर पर हम कुछ नहीं कर सकते।
डीके गोचर, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय