- आसान होती नहीं दिख रही रावतभाटा से कोटा की राह...
रावतभाटा. रावतभाटा से कोटा के बीच की दूरी मात्र ५० किमी है। इसके बाद भी लोग सफर करने से कतराते हैं। क्षतिग्रस्त और गड्ढों भरी इस सड़क पर वाहन चलाने में लोगों के पसीने निकल आते हैं। इस राह को आसान करने की लम्बे इंतजार के बाद कोटा सार्वजनिक निर्माण विभाग ने बीड़ा उठाया तो वन विभाग ने अड़ंगा अटका दिया। सड़क निर्माण कार्य शुरू होते ही एक बार फिर से खटाई में पड़ता नजर आने लगा है।
तीन बार रुकवाया
कोटा सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से कोटा-रावतभाटा मार्ग पर नया गांव से लेकर रावतभाटा सीमा तक 28 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। इसमें रिहायशी ग्रामीण इलाके में 1200 मीटर सीसी सड़क बनेगी। निर्माण कंपनी के मनोज शर्मा ने बताया कि कोलीपुरा के पास वन क्षेत्र में सड़क की स्थिति अत्यधिक खराब होने की वजह से पहले उसी स्थान निर्माण सामग्री व मिक्सर प्लांट लगा कर निर्माण कार्य शुरू किया था। लेकिन वन विभाग ने रुकवा दिया। जगह बदल कर काम शुरू किया तो फिर वन विभाग ने दूसरी और तीसरी बार काम रुकवा दिया। अब उस स्थान से करीब 14 किलोमीटर दूर बोरावास ग्रामीण क्षेत्र में निर्माण कार्य शुरू कर सीसी सड़क बनाई जा रही है।
बदहाल सड़क, सफर मजबूरी
रावतभाटा का निकटतम बड़ा शहर कोटा है। रावतभाटा की जिला मुख्यालय चित्तौडग़ढ़ से दूरी 140 किलोमीटर से अधिक दूरी होने की वजह से यहा के लोगों का कोटा से जुड़ाव है। कोटा रावतभाटा मार्ग पर प्रतिदिन करीब 5 सौ छोटे-बड़े वाहन आवागमन करते है। सामान्य परिस्थितियों में खस्ताहाल सड़क की वजह से कोटा का 50 किलोमीटर सफर कष्ट दायक और थका देने वाला होता है। सफर के दौरान सड़क बेच स्थित गड्डों से बचाने के कारण कई वाहन हादसों के शिकार हो चुके है। जिसमें कुछ लोग तो अपनी जान भी गवां चुके है। वहीं दूसरी ओर रावतभाटा स्थित परमाणु बिजलीघर के 150 से ज्यादा कर्मचारी संयंत्र स्थल में पदस्थ है। इसलिए रोजाना अपडाउन करना उनकी मजबूरी है। चिकित्सकीय आपातकाल की स्थिति में निकटस्थ बड़ा चिकित्सालय कोटा में है। ऐसे में रावतभाटा से रेफर किए मरीजों व प्रसूताओं को कोटा पहुंचाने में उनकी जान पर बन आती है। वहीं परमाणु बिजलीघर की संचालित बहु इकाइयों व निर्माणधीन एनएफसी में भविष्य में कोई आपात की स्थिति पैदा होती है, तो बदहाल सड़क की वजह से रावतभाटा के लोग गंतव्य तक पहुंचने से पहले बीच रास्ते में अटक जाएंगे।
वन विभाग की ओर से वन क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य शुरू करने से पूर्व अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा गया था। इसके लिए विभाग की ओर से आवेदन कर दिया गया है। अनापत्ति मिलते ही वहां भी काम शुरु कर दिया जाएगा।
-निलिमा सिंह, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, कोटा