
International Day of Persons with Disabilities: यह कहानी है MP के सागर निवासी सोनल जैन की। सात साल की उम्र में अपना एक हाथ गंवा चुकी सोनल ने कभी हार नहीं मानी। सोनल वर्तमान में कोटा में राजस्थान ग्रामीण बैंक की आरकेपुरम शाखा में असिस्टेंट मैनेजर पद पर कार्यरत है।
खेलते समय सोनल अचानक 11 केवी हाइटेंशन लाइन की चपेट में आ गई। करंट का झटका इतना जोरदार लगा कि शरीर झुलस गया। एक हाथ पूरा खराब हो गया और दूसरे का पंजा भी चपेट में आ गया। इलाज करवाया तो जैसे-तैसे एक हाथ का पंजा तो जुुड गया पर दूसरा हाथ गंवाना पड़ा। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बाद सोनल को पूरी तरह से ठीक होने में 12 साल लगे।
सोनल में आगे बढने की ललक थी। लिहाजा उसने पढने का सिलसिला शुरू किया। प्रारंभिक पढ़ाई सागर में करने के बाद ग्रेजुएशन इंदौर से की। एमबीए भी किया। इसके बाद प्रतियोगी परीक्षाएं देना शुरू कर दिया। मेहनत का परिणाम यह रहा कि वर्ष 2014 में बैंक सेवा में चयन हो गया और बांसवाड़ा पोस्टिंग मिली और वर्ष 2015 जुलाई में तबादला कोटा हो गया ।
सोनल बैंक में कम्प्यूटर पर दूसरों कार्मिकों की रफ्तार से ही काम कर लेती है। इसके लिए एक हाथ में कम्प्यूटर का माउस रहता है और मुंह में पेन रखकर की-बोर्ड के बटन दबते हैं और हाथ से माउस चलता है। धीरे-धीरे अब ऐसी आदत हो गई कि दूसरे कार्मिकों की तरह आउटपुट देती है।
सोनल बताती है कि वह आज जो कुछ भी है उसके पीछे परिवार है। मां किरण जैन ने मुझे आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। पिता सुमित कुमार जैन व्यवसायी हैं। सोनल विवाहित है और ढाई वर्ष का एक बेटा भी है। तीन भाई बहनों में सबसे छोटी सोनल के लिए अभी भी परिवार तैयार रहता है। वो कहती है कि परिवार ही था जिसकी बदौलत में कुछ बन पाई।