कोटा

पटरी पर ट्रेन दौड़ा रही ऊषारानी तो आकांक्षा संभाल रही ट्रेन गार्ड की जिम्मेदारी..

ऐसा कोई काम नहीं है, जिसे महिलाएं नहीं कर सकती।
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Mar 08, 2019
kota news
पटरी पर ट्रेन दौड़ा रही ऊषारानी तो आकांक्षा संभाल रही ट्रेन गार्ड की जिम्मेदारी

पश्चिम मध्य रेलवे में सहायक लोको पायलट के पद पर तैनात ऊषारानी आत्मविश्वास के साथ ट्रेन दौड़ा रही हैं। उन्होंने कहा, उनका काम चुनौती भरा है, केबिन में घंटों खड़ा रहना पड़ता है। इंजन के कैब में सुविधाएं नहीं रहती। इसके बाद भी यात्रियों को गंतव्य स्थान तक पहुंचाने पर सुखद अहसास होता है। ट्रेन चलाते समय पूरी तरह अलर्ट रहता है, उस समय निजी जीवन के बारे में विचार तक नहीं आते, केवल सेफ्टी के साथ ट्रेन संचालन पर ध्यान रहता है। महिलाएं शिक्षक और दफ्तर का ही कार्य कर सकती हैं, इस मानसिकता में अब बड़ा बदलाव आया है। वे मालगाड़ी और यात्री दोनों तरह की ट्रेन चलाती हैं। मूल रूप से डीग की रहने वाली ऊषारानी वर्ष 2014 में से ट्रेन दौड़ा रही हैं। उन्होंने इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। उन्होंने कहा, ऐसा कोई काम नहीं है, जिसे महिलाएं नहीं कर सकती।

सबसे पीछे डिब्बे में अकेले ड्यूटी करनी पड़ती है
टे्रन गार्ड यानी पूरी ट्रेन के लिए जिम्मेदार रेलकर्मी। सर्दी, गर्मी या बरसात में ट्रेन के सबसे पीछे डिब्बे में अकेले ड्यूटी करनी पड़ती है। करीब 90 डिब्बों की मालगाड़ी जब जंगल में ठहरती है तो चालक और गार्ड के बीच की दूरी इतनी होती है कि पांच मिनट से ज्यादा समय एक-दूसरे के पास आने में लगता है। पहले महिलाएं इस जॉब में नहीं आती थी, लेकिन अब महिलाओं ने भी गार्ड के रूप में बेहतर कार्य कर पहचान बनाई है। कोटा मंडल में गार्ड के पद तैनात आकांक्षा चौहान ने भी यह चुनौतीभरा कॅरियर चुना है। विज्ञान संकाय में स्नातक तक पढ़ी आकांक्षा चौहान मूल रूप से आगरा की रहने वाली हैं और अक्टूबर 18 से वे कोटा मंडल में गार्ड के रूप में सेवा दे रही हैं। उन्होंने उनका थोड़ा चुनौतीभरा है, शुरू में थोड़ा अजीब लगा, लेकिन अब वे पूरी रुचि के साथ ड्यूटी करती हैं।

Published on:
08 Mar 2019 09:40 pm