
कोटा. हवा से बातें करते लापरवाह बाइकर्स पर पुलिस दिनों-दिन मेहरबान हो रही है। पिछले तीन साल से पुलिस के कामकाज का ढर्रा तो कम से कम यही बता रहा है। तेज रफ्तार वाहन चालकों पर पुलिस की मेहरबानी इस साल कुछ ज्यादा ही रही। गौरतलब है कि पिछले दिनों एक लापरवाह मोटरसाइकिल चालक के कारण एक मासूम को जान तक गंवानी पड़ गई। इस मामले को लेकर शहर में विभिन्न संगठन आंदोलन भी कर रहे हैं। इसके बाद भी पुलिस ने लापरवाह तेज रफ्तार बाइकर्स की जांच तक शुरू नहीं की।
पुलिस की उदारता बनी लोगों की दुश्मन
कोटा में पुलिस ने करीब ढाई साल में तेज रफ्तार वाहन चलाने के मामले में 7382 वाहनों के चालान किए हैं। इसमें से लगभग आधे वर्ष 2016 में किए गए। तब 3509 वाहनों के चालान बनाए गए थे। इसके बाद वर्ष 2017 में संख्या कम होती गई और पुलिस ने 2609 वाहनों के तेज रफ्तार वाहन चलाने के जुर्म में चालान बनाए। इस वर्ष पुलिस हाथ पर हाथ धर कर बैठ गई। जनवरी से जुलाई 2018 तक मात्र 1264 वाहन चालकों के ही चालान बनाए गए। पुलिस की इस सुस्ती के कारण ही शहर में ट्रैफिक ढर्रा बिगडता चला गया।
हाइवे तक ही सीमित है कार्रवाई
मजेदार बात यह है कि पुलिस ने तेज रफ्तार वाहन चलाने के मामले में जितनी भी कार्रवाई की है। उसमें से अधिकांश कार्रवाई शहर से बाहर हाइवे पर की। शहर में कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरे के समान ही है। इस वजह से शहर में तेज रफ्तार वाहन चालकों को कोई रोकने-टोकने वाला तक नहीं होता है। अलबत्ता पिछले दिनों श्रीनाथपुरम में एक बालक जयादित्य की मृत्यु के बाद लोगों के गुस्से को देखते हुए दो दिन से नयापुरा थाना इलाके में पुलिस ने अपनी इंटरसेप्टर वैन को घुमाना शुरू कर दिया है। रविवार रात यह वैन विवेकानंद सर्किल पर बृज सिनेमा की ओर खड़ी थी। आमतौर पर वहां से तेज रफ्तार में वाहन निकलते भी नहीं हैं।
शराब में धुत वाहन चालक
शहर में शराब के नशे में धुत वाहन चालकों की भी कमी नहीं है। हालात यह कि वर्ष 2016 में सालभर में 1325 लोग नशे में वाहन चलाते पकड़े गए, वहीं इस वर्ष सात महीनों में ही ऐसे नशेड़ी वाहन चालकों की संख्या 2535 तक पहुंच गई।
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शहर में लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इस तरह के लापरवाह वाहन चालकों ने ट्रैफिक व्यवस्था बिगाड़ रखी है। इसे सुधारा जाना चाहिए।
राजेन्द्र गोयल, निवासी दादाबाड़ी
पुलिस ऐसे मामलों में कार्रवाई करे, तेज रफ्तार मोटर साइकिलों पर लोग अब गलियों में भी निकलने लगे हैं। इससे लोगों को अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी असुरक्षा महसूस होती है।
उमेश अजमेरा, इन्द्रा विहार
पुलिस की लापरवाही ने शहर में हालात बिगाड़ रखे हैं। शराब के नशे में और लापरवाह बाइकर्स को रोकने के लिए पुलिस अब तो कुछ करे।
राजेश मालवीय, विक्रम चौक