कुशीनगर

जिले की मुख्य पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली लगभग ध्वस्त, सिंचाई के लिए नहीं मिल रहा पानी

कई माईनरों में एक दशक से नहीं आ रहा पानी

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gandak nahar

कुशीनगर. किसानों की आय दोगुनी करने की बात करने वाली भाजपा सरकार में भी सिंचाई व्यवस्था धवस्त है। जिले की लाईफ लाईन मानी जाने वाली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली लगभग ध्वस्त हो गई है।

जिले की नहरों की देखभाल करने के लिए अभियंताओं की भारी भरकम टीम रहने तथा हर साल सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद भी अधिकतर नहरें खेतों की प्यास बुझाने में सक्षम नहीं हैं। कई नहरों एक दशक से ज्यादा समय से पानी नहीं आ रहा है। नहरों को बेकार समझ कर उन्हें जगह- जगह पाट दिए हैं। यह बात अलग है कि आंकड़ों की बाजीगरी से जिले में खेतों की भरपूर सिंचाई हो रही है। मालूम रहे कि नेपाल से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के महराजगंज व कुशीनगर जनपद होते हुए बिहार प्रांत को जाने वाली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर का निर्माण 1971 में पूरा हो जाने के बाद कुशीनगर में सिंचाई विभाग ने एक नहर प्रणाली विकसित की और करीब 1700 किमी. नहरों का संजाल जिले में बिछ गया।

इसका नतीजा यह हुआ कि खेतों की सिंचाई के लिए किसानों को भरपूर पानी मिलने लगा और कृषि ऊपज में क्रांति आ गई। जिले के लिए लाईफ लाईन बनी मुख्य पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली की हालत वर्ष 2000 तक तो ठीक रही लेकिन धीरे-धीरे भ्रष्टाचार का घून नहरों की सेहत को कमजोर करता चला गया। धीरे-धीरे स्थिति यह आ गई कि वर्ष 2008 में सिंचाई विभाग स्वयं मानने लगा कि मुख्य पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली की पुनर्स्थापना के बगैर खेतों को पानी देना संभव नहीं है। वर्ष 2008 में विभाग ने शासन को पत्र भेजकर पुनर्स्थापना के लिए 55 करोड़ रुपये की मांग की थी। सरकारों द्वारा समय- समय पर रुपये दिए भी गए लेकिन जिले की नहरों, माईनरों व कुलावों की हालत नहीं सुधरी। आज स्थिति यह है कि लक्ष्मीपुर माईनर जैसी जिले में एक दर्जन से ज्यादा नहरें ऐसी हैं जिनमें एक दशक से पानी ही नहीं आ रहा है। बेकार मानकर ग्रामीण जगह -जगह नहरों को पाट दिए हैं। उनके किनारे गन्ने की पत्ती रखने, सब्जी उगाने जैसे काम कर रहे हैं। ताजुब्ब की बात यह है कि लक्ष्मीपुर जैसी इन नहरों की कागज में सफाई हर साल होती है और इनसे खेतों की भरपूर सिंचाई नहीं है। जिले मे नहरों की हालत इसी बात से समझा जा सकता है कि उनकी सिंचन क्षमता आधा से भी कम रह गई है और किसी भी माईनर के टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। यही नहीं जिले कि कोई भी नहर , माईनर अपने ड्राईंग के हिसाब से सेप में नहीं है। बीते दिनों जिले में आए प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के सामने भी जिले की नहरों की दुर्दशा की बात उठी थी लेकिन वह भी आंकडों की भाषा में जबाब देकर कोई जांच कराने की जरूरत नहीं समझे।

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Published on:
09 Apr 2018 02:11 pm
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