
लखीमपुर खीरी. केंद्र और राज्य की सरकारें शिक्षा को जितना बेहतर बनाने का प्रयास करती हैं। व्यस्था उतनी ही हाथ से फिसलती नजर आती है। कभी सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर दिखती है, तो सिस्टम फेल हो जाता है और कभी सिस्टम बनता है तो सरकार फेल हो जाती है। कुछ इसी प्रकार का हाल लगभग यूपी के सभी जिलों में है।
तबादले के चलते हालात हुए और खराब
आप को बताते चलें कि बेसिक शिक्षा विभाग में लंबे अरसे से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। वहीं शिक्षकों के अंतर्जनपदीय तबादले ने तो हालत और भी बेपटरी कर दी है। करीब 700 शिक्षकों के तबादलों से अप्रैल में खोले गये। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का गणित गड़बड़ा गया है। जिनमें पहले से ही मानक के मुताबिक 50% शिक्षकों की कमी थी। सरकार ने गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिये अंग्रेजी माध्यम से निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।आ जिस के क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग में 80 प्राथमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में मार्च 18 में कर लिया था।
अधूरी तैयारियां पड़ी भारी
अप्रैल में आधे अधूरे इंतजाम के बीच अंग्रेजी माध्यम के कक्षाएं संचालित कर दी गई थी। जिसमें 400 शिक्षकों का चयन किया जाना था। लेकिन 185 शिक्षकों ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने के लिए आवेदन किया था। दोबारा विज्ञप्ति निकलने के बाद शिक्षकों की संख्या 210 तक पहुंची थी। लिहाजा बीएसए मानक पांच-पांच शिक्षकों के बजाए दो-तीन शिक्षकों की विद्यालय में तैनाती कर किसी तरह अंग्रेजी माध्यम पढ़ाई प्रारम्भ कराई थी। इसके बाद अंतर्जनपदीय तबादला में प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापकों के तबादले किए जाने से ज्यादातर अंग्रेजी माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक दूसरे जिले चले गये। अब दो जुलाई 2018 से सत्र प्रारंभ होना है। जिसमें कक्षाएं संचालित करने के लिए अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
कई स्कूल बंद होने की कगार पर
वहीं बीएसए बुद्ध प्रिय सिंह ने बताया कि शिक्षकों की पहले से ही कमी थी। इसके बाद अंतर्जनपदीय तबादले से कई स्कूल बंद होने की कगार पर है। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में आवश्यकता से शिक्षक कम ही थे। लेकिन तबादले में काफी शिक्षक दूसरे जिले में चले गए। और दूसरे जिलो से यहां आने वाले शिक्षकों की संख्या अभी काफी कम है। लिहाजा अब अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए नए सिरे से चयन प्रक्रिया कराई।