
लखीमपुर खीरी. न झंडा न सीटी फिर कहे का टीटी, आप ने अक्सर यह कहावत सुनी होगी। सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगता है। लेकिन बात एकदम ठीक है। हम जिसके के लिये काम कर रहे है। अगर उसके लिये संसाधन उपलब्ध नही। तो फिर काम करने से क्या फायदा।
3 साल से नहीं मिली गोली
जी हां, प्रदेश के इकलौते दुधवा नेशनल पार्क और दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन और दक्षिण खीरी वन प्रभाग खीरी की। जहां वन संपदा और वन्य जीवों की सुरक्षा का दायित्व निभाने वाले वन कर्मियों को पिछले 3 साल से असलहे के लिए गोली तक नहीं दी गई। बिना गोली के ही इन हथियारों के साथ इनसे गश्त कराकर सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई जा रही है। आलम यह है। कि इसके पास टॉर्च, लाठियां, वाहन और डीजल भी नहीं दिया जा रहा है। वहीं इस समय वन्य जीवों की तस्करी करने वाले और वन्य संपदा को चोरी-छिपे काट कर ले जाने वाले अपराधी इस समय हाईटेक संसाधनों से लैस है। ऐसे में वन कर्मियों के पास खाली बंदूक और अन्य संसाधनों के अभाव में पेट्रोलिंग की खाली रस्म अदायगी ही की जा रही है।
नहीं दी जा रही पेट्रोल की सुविधा
यह खुलासा उस समय हुआ जब सहायक वन कर्मियों ने मानसून पेट्रोलियम और अपराध रोकने के लिए संसाधन उपलब्ध कराने का मामला उठाया। साथ ही इन समस्याओं से जिला स्तर के अधिकारियों को अवगत भी कराया। पूरे मामले में संघ के अध्यक्ष नागेंद्र पांडे ने बताया कि जिले में बाघ और वन्यजीव के बाहर निकलने से मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही है। इसके संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए वन कर्मियों के पास संसाधन न होने के चलते मानसून पेट्रोलिंग का काम कर पाना बहुत ही मुश्किल है। अध्यक्ष ने बताया कि वनकर्मियों को 3 साल से बंदूक की गोलियां तक नही दी गई है। आलम यह है कि वनकर्मियों के पास इस समय टार्च, लाठियां, कारतूस, वाहन और वाहनों में पेट्रोल की सुविधा नहीं दी जा रही है। वहीं दूसरी तरफ अपराधी हाईटेक संसाधनों से लैस होकर अपना काम कर रहे हैं।
कारतूस के लिए भेजी गई डिमांड
बफर जोन के लिए मांगा 3000 कारतूस का स्टॉक दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के डीडी अनिल पटेल ने बताया कि कारतूस के लिए डिमांड भेजी गई है। जिसमें 3000 कारतूस मांगे गए हैं। बरहाल अभी वनकर्मियों के पास कारतूस मौजूद है। अन्य संसाधनों की भी व्यवस्था की जा रही है।
पर्याप्त है वनकर्मियों के पास संसाधन
दुधवा नेशनल पार्क की फील्ड डायरेक्टर रमेश पांडे ने बताया कि इस समय पार्क के कर्मचारियों के पास संसाधन मौजूद हैं। बेहतर काम करने के लिए अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के लिये डिमांड भेजी जा चुकी है। साथ ही हाईटेक संसाधनों की भी डिमांड की जा रही है।