
लखीमपुर खीरी. काफी इंतजार के बाद बुधवार को मानसून ने आखिरकार दस्तक दे ही दी। दिन में रुक-रुक कर हुई बारिश ने जहां लोगों को गर्मी से राहत दी। वहीं जिले के दो तिहाई हिस्से पर बाढ़ व कटान का खतरा भी मंडराने लगा है। लोगों में डर है कि जिले से गुजरने वाली छोटी बड़ी सात नदियां कहीं इस बार भी अपना रौद्र रूप ना दिखा दें। हालांकि इसके लिए जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है।
सैकड़ों गांव में बाढ़ का खतरा
करीब 42 लाख की आबादी वाले इस जिले में हुए। एक सर्वे के मुताबिक इस बार 6 तहसीलों के करीब दो सैकड़े से अधिक गांव पर बाढ़ व कटान का खतरा मंडराने लगा है। वहीं पाच तहसीलों के लगभग 72 गांव बाढ़ व कटान के दायरे में आ सकते हैं। इसको लेकर प्रशासन की नींद अभी से उड़ गई है। निघासन में शारदा और मोहाना, धौरहरा में घाघरा की विनाशकारी लहरें साल-दर-साल से गांव के गांव ही निगल कर उनका वजूद खत्म कर रही है।
ये गांव भी बाढ़ के निशाने पर
इसी तरह से धौरहरा के 55 गांव भी बाढ़ और कटान के निशाने पर है। इन दिनों यह बाढ़ जिले के दो तिहाई हिस्से में तांडव करती है। लेकिन सबसे ज्यादा तबाही का मंजर धौरहरा तहसील में होता है। यहां पर इस बार भी 55 गांव घाघरा नदी के निशाने पर हैं। जिनमें बेलागड़ी,डुडकी, रुद्रपुर फिरोजाबाद, बगियापुर, सुजानपुर, गैर आबद, रंजीत नगर, मटेरा, करातीपुरवा राजापुर, मज्जा, सुनकी आदि है। वहीं निघासन तहसील क्षेत्र में 54 बाढ़ व कटान के निशान पर है। इसी तरह से लखीमपुर तहसील के 40 गांव गोला तहसील के 14 गांव बाढ़ व कटान के निशाने पर हैं। जबकि पलिया तहसील के 37 गांव बाढ़ व कटान के मुहाने पर खड़े हैं। पिछले साल करीब 10 लोगों की मौत बाढ़ और कटान के कारण हुई थी। हालांकि प्रशासन के मुताबिक यह संख्या केवल छह थी।
80 गोताखोर करेंगे हालात पर काबू
जिला प्रशासन ने अभी से ही बाढ़ व कटान से होने वाली हानि से निपटने के लिए एनडीआरएफ के करीब 80 गोताखोरों को तैनात कर दिया है। इसमें सबसे ज्यादा 24 पलिया तहसील में क्षेत्र में, 21 गोताखोर धौरहरा तहसील क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। इसी तरह लखीमपुर 11 और निघासन में 17 गोताखोरों को तैनात किया गया है। इतना ही नहीं लखीमपुर, धौरहरा, पलिया निघासन में चार मोटर बोट और तीन रबर वोट व 370 नाव हर वक्त उपलब्ध रखी जाएंगी।
बाढ़ से निपटने की तैयारी पूरी
वही पूरे मामले में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इसी सप्ताह ही बाढ़ नियंत्रण कक्ष भी स्थापित कर दिया जाएगा। साथ ही 40 बाढ़ राहत चौकियां भी बनाई जाएंगी। जो कि 24 घंटे अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहेंगी। किसी भी दैवीय आपदा से निपटने की तैयारी पूरी कर ली गई है और प्रशासन के पास किसी भी चीज की कोई कमी नहीं है।