लखीमपुर खेरी

शारीरिक अक्षमता बाघों को बना रही आदमपुर

आईवीआरआई के वन्यजीव विशेषज्ञ डॉक्टर ए के शर्मा का कहना है कि बाघ कभी किसी इंसान पर अकारण हमला नहीं करता है।
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शारीरिक अक्षमता बाघों को बना रही आदमपुर

लखीमपुर खीरी. आईवीआरआई के वन्यजीव विशेषज्ञ डॉक्टर ए के शर्मा का कहना है कि बाघ कभी किसी इंसान पर अकारण हमला नहीं करता है। बाघ दो स्थितियो में ही किसी इंसान पर हमला करता है। या तो वह भूखा हो या इंसान चौपाई की स्थिति में हो जैसे वह झुककर फसल काट रहा हो या झुक कर कोई काम कर रहा हो तब बाघ उसे चौपाया जानवर समझ कर उस पर हमला कर देता है। बाघ जब जंगल के बाहर होता है। तो बाघ या तो पालतू पशुओं का शिकार करता है या फिर चौपाई की स्थिति में इंसान पर हमला करता है। तभी तक इंसान पर बाघ के जितने भी हमले हुए हैं। सभी में यही स्थिति सामने आई है। वही एके शर्मा का यह भी कहना है कि जब वन्यजीवों की अपेक्षा इंसान कम फुर्तीला होता है। इसीलिए बाघ उन्हें आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं। बाघ आमतौर पर नरभक्षी नहीं होता। बाघ उसी दशा में आदमखोर होता है। जब वह किसी कारण से फुर्तीले जानवरों का शिकार करने में सक्षम हो जाता है। और बुढ़ापा आना या दांत टूट जाना अथवा पैर में दिक्कत होने से भागने में सक्षम हो तो वह आसानी से शिकार ढूढता है। एक दो इंसानों का शिकार करने के बाद उस की प्रवृत्ति बदल जाती है। और वह आदमखोर हो जाता है। मैलानी क्षेत्र में 2 साल पहले छ लोगों को निवाला बनाने वाले बाघ को जब ट्रकुलिज करके पकड़ा गया। तो पता चला कि उसका एक दांत टुटा हुआ था। ऐसे ही करीब 10 साल पहले संपूर्णानगर के कांपटाडा में आदमखोर बाघ और उसके बाद विसेनपुरी में मारी गई। बाघिन काफी उम्र दराज़ थी। जिसके लिए शिकार कर पाना मुश्किल था। यह अपनी सुरक्षा के मद्देनजर जंगल से बाहर किनारे फिर कर खेतों में आकर इंसानों और पालतू जानवरों पर आसानी से शिकार कर लेते है।


जंगल का प्रबंधन सुधारने की जरूरत
दुधवा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर रमेश कुमार पांडे का कहना है।कि बाघ जंगल से बाहर ना निकले इसके लिए जरूरी है। कि उन्हें पर्याप्त भोजन पानी और अनुकूल प्राकृतिक आवास मिले। इसके लिए ग्रास लैंड और वैसलैंड विकसित करने की जरूरत है। इस पर वन विभाग काफी काम कर रहा है। लेकिन और बहुत काम करना बाकी है। ग्रासलैंड और वेटलैंड मैनेजमेंट में जंगल के शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या बढ़ती है। इसे खाद्य श्रंखला मजबूत होगी। जंगल में ही पर्याप्त भोजन पानी मिलने पर बाघो को जंगल से बाहर निकलने की जरूरत नहीं होगी। उनका मानना है। कि बाघो को एक जंगल से दूसरे जंगल तक जाने के लिए कारीडोर बनाना चाहिए। ताकि बाघ खेत का सहारा के बिना एक जगह से दूसरी जगह जा सके।

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