
लखीमपुर खीरी. सूबे की सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद महिलाओं पर होने वाले जुल्मों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। ताजा मामला लखीमपुर खीरी के थाना फरधान क्षेत्र के एक गांव से आया है। जहां पर 15 दिन पहले एक छात्रा के साथ बलात्कार हुआ था। जिसकी एफआईआर और मजिस्ट्रेट बयान के बाद भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए। दिन प्रतिदिन पीड़ित पक्ष को मामला वापस लेने की और जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। आज रेप पीड़िता उस वक्त धरने पर बैठ गई जब उसको जिले केेेे प्रशासनिक अफसरों द्वारा न्याय नहीं मिला। पीड़िता का आरोप है कि लखीमपुर खीरी के श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र की भारतीय जनता पार्टी की मौजूदा विधायिका मंजू त्यागी के कार्यकर्ता होने के कारण उनकी गिरफ्तारी नहीं हो रही।
आपको बता दें कि मामला थाना फरधान थाना क्षेत्र के एक गांव का है। जहां पर पीड़ित लड़की के बयानों के मुताबिक 12 सितंबर को शाम करीब 8:30 बजे दुकान पर सामान लेने जा रही थी। उसी वक्त गांव के ही 4 युवक दो बाइक से आकर लड़की के पीछे से बंदूक लगा दी और मुंह दबाकर जबरन लड़की को बाइक पर बैठा लिया और गांव के करीब जंगल में ले गए जहां पर उसके साथ बलात्कार किया। उसके बाद उन दरिंदों ने लड़की को बेहोशी की दवा खिला दी और जब लड़की को होश आया तब वह सड़क पर पड़ी थी। आरोपी घटना को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए। वहां से उस पीड़ित लड़की को एक महिला पुलिस, लखीमपुर खीरी के महिला थाने ले आयी जहां पर लड़की की मां की तहरीर के अनुसार पुलिस ने मुकदमा न दर्ज करके 363, 366 आईपीसी की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया।
पीड़ित लड़की द्वारा 164 के बयानों में बलात्कार का होना बताया गया। मामला पुलिस में दर्ज होने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। जिससे कि आरोपी पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने लगे और उन्हें जान से मार देने की धमकी देने लगे तब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाने के लिए जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक खीरी की चौखट पर कई बार आए मगर वहां भी उन्हें न्याय ना मिल सका और पीड़ित पक्ष ने यह आरोप लगाया कि लखीमपुर खीरी के श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायिका मंजू त्यागी के कार्यकर्ता होने के कारण अभी तक अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। जिससे कि डरे सहमे पीड़ित परिवार लखीमपुर खीरी के विलोबी मेमोरियल हॉल में गले में तख्ती टांग कर धरने पर बैठ गए। इधर विधायक मंजू त्यागी का कहना है कि उनके ऊपर लगाया गया आरोप निराधार है।