
लखीमपुर खीरी. नदियों की बहाने वाली कलकल धारा जीवनदायिनी कहलाती है लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के चलते आजकल नदियां अपने मूल स्वरुप को धीरे-धीरे खोती जा रही हैं। यानी कि फसलों का उत्पादन बढ़ने वाली और लोगों की प्यास बुझाने वाली नदियां कई स्थानों पर खूब बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। इनमें आदि गंगा गोमती यानी गोमा भी शामिल हो गई है। गोमती नदी के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को दूर करने के लिए भागीरथी प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
मोहम्मदी तहसील क्षेत्र के बराबर में कई स्थानों पर गोमती नदी एक एक बूंद पानी को तरस रही है। नदी के बीच का हिस्सा रेत का ढेर बना गया है। कई स्थानों पर नदियां सूख गई है। इस कारण मानव हो या जीवजंतु सभी एक एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। अभी हाल ही में बीती रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदिगंगा गोमती के उद्वार के लिए राजधानी में सफाई अभियान चलाकर गोमती की अविरलता के लिए प्रयास किया। लेकिन गोमती का पानी लखनऊ पहुंचने से पहले ही सूख रहा है। ककराघाट बरुआघाट क्षेत्र में गोमती नदी का पानी सूख गया है। जबकि फ़क़ीरपुर के पास नीमघाट व रामपुर मिश्र के नजदीक गोमती दलदल में तब्दील हो चुकी है। यह सबसे ज्यादा लगातार चिंता का विषय बना हुआ है।
वहीं दूसरी ओर नेशनल हाइवे की रफ्तार बढ़ाने के लिए राजधानी की लाइफलाइन गोमती की प्राकृतिक धारा को परिवर्तन कर दिया गया। बरेली से सीतापुर के मध्य नेशनल हाईवे 24 को संस्था द्वारा खीरी हरदोई जिला सीमा पर हेरमखेड़ा गांव के निकट गोमती नदी पर पुल निर्माण के लिए बड़े-बड़े पत्थर डालकर काम करने के लिए धारा को मोड़ दिया गया था। लेकिन कार्यदाई संस्था द्वारा डाले गए पत्थर अब तक नहीं हटाए गए हैं। इस वजह से पल के एक तरफ पानी पहुंचने के कारण जल स्तर घट गया है। वहीं दूसरी तरफ सिल्ट जमा होने के साथ नदी तालाब का रूप ले लिया है। पानी का बहाव थमने से आदिगंगा के नाम से विख्यात गंगा नदी की सहायक व राजधानी लखनऊ की लाइफलाइन गोमती दलदल बन गई है।
पूरे मामले में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि अभी गोमती नदी के प्रवाह पर निबाध बनाए जाने की दिशा में पीलीभीत से योजना चल रही है। जिसमें खीरी में भी नदी का प्रवाह अविरल रहेगा। हम खीरी जिले में भी कार्य योजना बना रहे हैं। कि यहां की गोमती की धारा को बहाने की दिक्कत ना हो और जो है। उनको अभियान चलाकर दूर किया जा सके।