
ललितपुर. सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार 11 से 25 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा मनाया गया। पखवाड़े की राज्य स्तरीय की रिपोर्ट में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए, यह पखवाड़ा अब 31 जुलाई तक चलाया जाएगा। परिवार नियोजन कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में विभिन्न सुविधाओं और संसाधनों का उपयोग किया गया है। इसमें 11 से 24 जुलाई तक 41 महिला नसबंदी, 1 पुरुष नसबंदी, 276 पीपीआईयूसीडी, 163 आईयूसीडी, गर्भनिरोधक गोली (छाया, माला-डी) 3912, अंतरा इंजेक्शन 58 एवं का उपयोग किया गया।
कई तरह की विधियां प्रयोग में
महिलाओं के स्वास्थ्य को देखते हुए परिवार को नियोजित करने के लिए आधुनिक विधियों के रूप में एक-दो नहीं बल्कि अनेक विधियां प्रयोग में चल रही हैं। जैसे कि अंतरा, छाया, ईसीपी गोलियां जिनकी बढ़ती लोकप्रियता की वजह से पारंपरिक विधियां अपनाने वाले लोगों की संख्या में कमी आंकी गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2017-18 के अनुसार भारत विश्व में पहला ऐसा देश है, जिसने वर्ष 1952 में परिवार नियोजन के लिए राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम शुरू किया था। इसके बाद समय दर समय इस कार्यक्रम में नई-नई विधियां जुड़ती गईं।
तीन विधियों में होता है प्रयोग
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 4 के अनुसार ललितपुर में लगभग 69 प्रतिशत दंपति परिवार नियोजन की विधियों को अपनाते हैं, जिसमें 10 प्रतिशत लोग ही पारंपरिक विधि को अपना रहे हैं। वही उत्तरप्रदेश में लगभग 13 प्रतिशत लोग पारंपरिक विधियों को अपना रहे हैं, जो कि वर्ष 2005-06 से 1 प्रतिशत कम है। सिफ़प्सा के मंडलीय कार्यक्रम प्रबन्धक आनंद चौबे बताते हैं कि परिवार नियोजन की पारंपरिक विधियों के रूप में वर्तमान में तीन विधियां हैं, जिसका प्रयोग लोग कर रहे हैं। पहली विधि महिलाओं द्वारा अपनायी जाती हैं, जब वह अपने मासिक धर्म चक्र के कुछ असुरक्षित दिनों में यौन संबंध नहीं बनाती हैं। इससे उन्हें गर्भ धारण नहीं होता। वहीं, दूसरी विधि हैं स्तनपान द्वारा गर्भनिरोध। इसके अलावा कुछ भी नहीं तो वह भी 6 माह तक मां नहीं बन सकती, बशर्ते उन्हें फिर से रक्तस्त्राव न हो रहा हो। वहीं तीसरी विधि पुरुषों द्वारा अपनायी जाती है, जब संभोग के समय वीर्य यौनि में न मिलने पाए।
इसके अलावा आधुनिक विधियों में पहले कि अपेक्षा बहुत तकनीक आ गई है। वर्तमान में अस्थायी विधियों के रूप में अंतरा, छाया, आईयूसीडी, एमरजेंसी गोली, व स्थायी विधियों के रूप में प्रसव और गर्भपात के बाद महिला नसबंदी और पुरुष नसबंदी चलन में हैं।